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ईरान पर सख्ती के पक्ष में खाड़ी देश, UAE-सऊदी ने ट्रंप की युद्धविराम पहल पर जताई आपत्ति

Published on: March 27, 2026
Gulf in favor of strictness on Iran
द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन/तेल अवीव/रियाद : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब ने ईरान के साथ जल्दबाजी में युद्धविराम की कोशिशों पर आपत्ति जताई है। अमेरिका में UAE के राजदूत यूसुफ अल ओतैबा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा है कि युद्ध का अंत ऐसा होना चाहिए, जिससे ईरान से पैदा होने वाला दीर्घकालिक खतरा पूरी तरह खत्म हो सके।

वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित अपने लेख ‘UAE Stands Up to Iran’ में अल ओतैबा ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संघर्ष का “निर्णायक परिणाम” जरूरी है, जो ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं के पूरे दायरे को संबोधित करे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी देशों ने ईरान पर नागरिकों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के आरोप लगाए हैं।

ट्रंप की पहल का विरोध

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्धविराम की कोशिशों में जुटे हैं, वहीं इजरायल, सऊदी अरब और UAE इस पहल से सहमत नहीं दिख रहे। बताया जा रहा है कि इन देशों ने अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी युद्धविराम के खिलाफ जोरदार लॉबिंग की है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी ट्रंप से बातचीत में यह चिंता जताई है कि अगर इस समय ईरान को नहीं रोका गया, तो वह और ज्यादा शक्तिशाली होकर उभरेगा।

ईरान की सैन्य क्षमता पर फोकस

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों की प्राथमिक चिंता यह है कि युद्ध खत्म होने से पहले ईरान की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल क्षमताओं को अधिकतम कमजोर किया जाए। एक क्षेत्रीय अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि UAE के लिए ईरान के मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम के साथ लंबे समय तक रहना “मुश्किल” होगा।

UAE के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गश ने भी हाल ही में कहा था कि उनकी रणनीति केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और जलडमरूमध्य में उसकी आक्रामक गतिविधियों पर अंकुश लगाना शामिल है।

अमेरिका का रुख

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान की हमलावर क्षमताओं को कमजोर करना है, जिसमें उसकी मिसाइल प्रणाली, उत्पादन क्षमता और नौसैनिक ताकत शामिल है।

क्षेत्रीय तनाव बरकरार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देशों ने संयुक्त राष्ट्र में भी ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कुवैत और UAE के प्रतिनिधियों ने ईरान पर क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में खाड़ी देश किसी भी जल्दबाजी में युद्धविराम के पक्ष में नहीं हैं और वे चाहते हैं कि ईरान की सैन्य ताकत को निर्णायक रूप से कमजोर किया जाए, ताकि भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।



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