द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई पर हुए खर्च को लेकर दायर आरटीआई (RTI) आवेदनों पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पार्टी ने इसे निजी व्यक्ति को निशाना बनाने की कोशिश बताया है और प्रतिक्रिया देते हुए पीएम केयर्स (PM CARES) फंड से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।
RTI के बाद CJP का पलटवार
रविवार को गुजरात के सूरत निवासी समाजसेवी अमित तिवारी ने बताया कि उन्होंने तीन अलग-अलग आरटीआई और शिकायतें दायर की हैं। इनमें CJP की फंडिंग, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा पार्टी को कथित आर्थिक सहयोग तथा अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च के स्रोत से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।
इन सवालों के सामने आने के बाद CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी निजी व्यक्ति की शिक्षा पर हुए खर्च को लेकर आरटीआई दायर करना उचित नहीं है। उन्होंने लिखा कि यदि पारदर्शिता की बात करनी है तो पीएम केयर्स फंड को लेकर भी सवाल उठाए जाने चाहिए।
अभिजीत दिपके का जवाब
इस विवाद पर पहले भी अभिजीत दिपके अपना पक्ष रख चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय से पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिली थी। साथ ही उन्होंने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन भी लिया, जिसे वह वापस चुका रहे हैं।
दिपके ने अपने दावों के समर्थन में स्कॉलरशिप से संबंधित दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की बात कही है।
RTI एक्टिविस्ट ने क्या आरोप लगाए?
समाजसेवी अमित तिवारी द्वारा की गई शिकायतों में मुख्य रूप से ये बिंदु शामिल हैं—
- चुनाव आयोग से CJP की फंडिंग की जांच की मांग।
- सीबीआईसी (CBIC) से कपिल सिब्बल द्वारा पार्टी को दिए गए कथित एक करोड़ रुपये के फंड पर जीएसटी संबंधी जांच की मांग।
- महाराष्ट्र सरकार से अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आय और उनके बेटे की विदेशी शिक्षा के खर्च की जांच कराने की मांग।
- शिकायत में कहा गया है कि यदि आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है तो संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करें।
इन आरोपों पर अभी तक संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है।
PM CARES फंड का क्यों हुआ जिक्र?
CJP की प्रतिक्रिया में पीएम केयर्स फंड का उल्लेख भी किया गया। यह फंड मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान बनाया गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय पहले स्पष्ट कर चुका है कि पीएम केयर्स फंड सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में नहीं आता।
साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी पीएम केयर्स फंड से जुड़ी एक जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह एक अलग स्वैच्छिक चैरिटेबल ट्रस्ट है और इसके गठन में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
फिलहाल यह मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। एक ओर RTI के माध्यम से फंडिंग और शिक्षा पर हुए खर्च की जानकारी मांगी गई है, वहीं CJP इसे निजी व्यक्ति को निशाना बनाने की कोशिश बता रही है। दूसरी ओर अभिजीत दिपके का कहना है कि उनकी उच्च शिक्षा स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के माध्यम से पूरी हुई। संबंधित शिकायतों पर सक्षम संस्थाओं की ओर से किसी अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है।
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