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यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन पर अखिलेश यादव का बड़ा संकेत, बोले- लोकसभा में साथ हैं, विधानसभा चुनाव अभी दूर

Published on: July 28, 2026
SP-Congress before UP elections 2027

द  देवरिया न्यूज़,लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बना हुआ है। क्या दोनों दल 2027 का विधानसभा चुनाव भी साथ मिलकर लड़ेंगे या फिर अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरेंगे? इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ताजा बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।

अखिलेश यादव ने सोमवार को कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लोकसभा चुनाव 2024 में एक साथ थीं और फिलहाल लोकसभा में भी दोनों दल साथ हैं। हालांकि, उन्होंने विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की। अखिलेश ने कहा कि विधानसभा चुनाव अभी दूर है।

कांग्रेस ने 403 सीटों पर तैयारी की बात कही

दरअसल, गठबंधन को लेकर यह चर्चा तब तेज हुई जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर पार्टी की तैयारी किए जाने की बात कही थी। उनके इस बयान को कांग्रेस की स्वतंत्र चुनावी रणनीति के संकेत के तौर पर देखा गया।

वहीं, अखिलेश यादव पहले भी दिल्ली में हुई INDI गठबंधन की बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में दोनों दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने गठबंधन को लेकर अटकलों को और मजबूत कर दिया है।

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर मीडिया के सवालों पर अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से कोई घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा, “हम लोकसभा में एक साथ हैं।” साथ ही उन्होंने पीडीए और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सपा की प्रतिबद्धता दोहराई।

अखिलेश ने कहा कि पार्टी लगातार पीडीए के साथ और सामाजिक न्याय की स्थापना के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव अभी दूर है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अखिलेश यादव का यह बयान 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज भी नहीं करता और इसकी पुष्टि भी नहीं करता। इससे साफ है कि सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

सीट बंटवारे पर फंसा पेंच?

लोकसभा चुनाव 2024 में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। बेहतर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले की तुलना में अधिक सीटों पर दावा कर सकती है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी की रणनीति जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों के आधार पर सीटों के बंटवारे की रही है।

यही मुद्दा दोनों दलों के बीच संभावित मतभेद की बड़ी वजह माना जा रहा है। कांग्रेस की ओर से जहां संगठन को मजबूत करने और अधिक सीटों पर तैयारी की बात सामने आ रही है, वहीं सपा अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में समझौते को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है।

2024 में गठबंधन से सपा को मिली बड़ी सफलता

लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के साथ गठबंधन समाजवादी पार्टी के लिए बेहद सफल रहा। इससे पहले 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा ने छोटे दलों के साथ गठबंधन किया था, लेकिन अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी थी।

2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 6 सीटों पर सफलता मिली। दोनों दलों के प्रदर्शन ने राज्य की राजनीति में विपक्षी गठबंधन को मजबूत किया और भाजपा के खिलाफ एक प्रभावी चुनावी चुनौती पेश की।

इसके बाद से अखिलेश यादव कई मौकों पर कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत देते रहे हैं। हालांकि, अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके बयान में बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने गठबंधन को लेकर सीधे तौर पर कोई प्रतिबद्धता जताने के बजाय सिर्फ लोकसभा में साथ होने की बात कही है।

क्या यूपी में अलग और केंद्र में साथ की रणनीति?

अखिलेश यादव के ताजा बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि सपा और कांग्रेस केंद्र की राजनीति में साथ रहते हुए उत्तर प्रदेश में अलग-अलग चुनाव लड़ने की रणनीति अपना सकते हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की उस रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और राज्य की राजनीति में स्वतंत्र भूमिका बनाए रखने की कोशिश की जाती थी।

हालांकि, अभी विधानसभा चुनाव में काफी समय बाकी है। ऐसे में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर सीट बंटवारे, राजनीतिक समीकरण और दोनों दलों के बीच होने वाली बातचीत के बाद ही साफ होगी। फिलहाल अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव 2027 के गठबंधन पर अपने पत्ते बंद रखकर कांग्रेस को स्पष्ट संकेत जरूर दिया है कि इस मुद्दे पर फैसला जल्दबाजी में नहीं होगा।


इसे भी पढ़ें : NEET पेपर लीक विवाद के बीच पटना में बड़े आंदोलन का ऐलान, जंतर-मंतर के बाद बिहार में प्रदर्शन की तैयारी


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