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बलूचिस्तान में आजादी की नई हुंकार, 11 अगस्त को ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ का स्वतंत्रता दिवस घोषित; पाकिस्तान की चुप्पी पर उठे सवाल

Published on: August 8, 2026
New freedom in Balochistan

द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में केंद्र सरकार और सेना के खिलाफ असंतोष लंबे समय से जारी है। बलूच संगठन दशकों से राजनीतिक अधिकार, संसाधनों में हिस्सेदारी और कथित भेदभाव को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। हालांकि हाल के दिनों में इस आंदोलन ने एक नया रूप लिया है। अब कुछ बलूच गुट खुलकर स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।

इसी क्रम में ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ नाम से सक्रिय संगठन ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस घोषित किया है। संगठन ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले बलूच समुदाय के लोगों से इस दिन को राष्ट्रीय एकता और उत्साह के साथ मनाने की अपील की है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक स्वतंत्र और संप्रभु बलूचिस्तान को मान्यता देने की मांग भी की गई है।

सोशल मीडिया पर तेज हुआ स्वतंत्र बलूचिस्तान का अभियान

इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर ‘इंडिपेंडेंट रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ से जुड़े दावे और संदेश तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। बलूच समर्थक समूह इस अभियान के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मांग को चर्चा में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि, इस घोषणा के बावजूद पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस्लामाबाद का पारंपरिक रुख यही रहा है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का अभिन्न हिस्सा है और प्रांत के अलग होने का कोई सवाल नहीं है।

पाकिस्तान की चुप्पी ने बढ़ाई चर्चा

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि इतनी बड़ी घोषणा के बावजूद पाकिस्तान सरकार और सैन्य नेतृत्व सार्वजनिक तौर पर प्रतिक्रिया देने से क्यों बच रहा है। खास तौर पर ऐसे समय में जब बलूच अलगाववादी गतिविधियों और स्वतंत्रता की मांग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान की चुप्पी को सीधे तौर पर किसी बदलाव या नरमी के संकेत के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक कारण हो सकते हैं।

एक संभावना यह है कि इस्लामाबाद इस घोषणा को अनावश्यक प्रचार देने से बचना चाहता हो। यदि पाकिस्तान सरकार इस पर बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया देती है तो इससे बलूच संगठन को और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज मिल सकती है और मुद्दा वैश्विक मंचों पर अधिक प्रमुखता से उठ सकता है।

क्या बलूच संगठन को प्रतिनिधि नहीं मानता पाकिस्तान?

पाकिस्तान की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आने की एक वजह यह भी हो सकती है कि इस्लामाबाद इस संगठन को बलूचिस्तान के लोगों का वैध प्रतिनिधि नहीं मानता। ऐसे में सरकार किसी संगठन की घोषणा पर प्रतिक्रिया देकर उसे राजनीतिक महत्व देने से बच सकती है।

इसके अलावा यह भी संभावना जताई जा रही है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही हों और सार्वजनिक बयान देने के बजाय खुफिया तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े स्तर पर स्थिति को संभालने की रणनीति अपना रही हों।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर नजर

‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ की घोषणा में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र बलूचिस्तान को मान्यता देने की अपील भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में पाकिस्तान की नजर इस बात पर हो सकती है कि विदेशी सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संगठन और प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियां इस घोषणा पर किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।

संभव है कि इस्लामाबाद पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का आकलन करे और उसके बाद अपने सार्वजनिक रुख को अधिक स्पष्ट करे। इसे पाकिस्तान की ‘देखो और इंतजार करो’ वाली रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

चुप्पी का मतलब नीति में बदलाव नहीं

जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की मौजूदा चुप्पी को बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के दावे को स्वीकार करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इस्लामाबाद ने अब तक बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा बताते हुए अलगाव की मांग को खारिज किया है और इस रुख में किसी आधिकारिक बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।

ऐसे में 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की अपील और उस पर पाकिस्तान की खामोशी ने बलूचिस्तान के मुद्दे को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान सरकार इस घोषणा पर औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर ही मामले को संभालने की कोशिश करती है।


इसे भी पढ़ें : ‘चीन ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया’, पूर्व एफबीआर प्रमुख का बड़ा दावा


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