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ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ के तहत मणिपुर से इजरायल पहुंचे बनी मेनाशे, 5000 लोगों को बसाने की योजना

Published on: April 25, 2026
Under 'Operation Wings of Dawn'
द  देवरिया न्यूज़,तेल अवीव : इजरायल और ईरान-लेबनान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अलग मानवीय और ऐतिहासिक मिशन चर्चा में है। इजरायल ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े बनी मेनाशे समुदाय के लोगों को उनके “मूल घर” इजरायल लाने के लिए ‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ शुरू किया है। इस मिशन के तहत करीब 5000 लोगों को मणिपुर और मिजोरम से इजरायल ले जाने की योजना बनाई गई है।
गुरुवार को इस अभियान के तहत 250 लोगों का पहला जत्था दिल्ली के रास्ते हवाई जहाज से तेल अवीव पहुंचा। बेन गुरियन एयरपोर्ट पर इनका स्वागत इजरायल के इमिग्रेशन मंत्री ओफिर सोफर और यहूदी एजेंसी के अध्यक्ष मेजर जनरल (रि.) डोरोन अल्मोग सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। सरकार ने इसे एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल बताया।
इजरायली सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि भारत में रह रहे बनी मेनाशे समुदाय के लगभग 4600 सदस्यों को चरणबद्ध तरीके से इजरायल बसाया जाएगा। योजना के अनुसार, साल 2030 तक हर साल करीब 1200 लोगों को इजरायल लाया जाएगा। पिछले दो दशकों में इस समुदाय के करीब 5000 लोग पहले ही इजरायल जा चुके हैं।
बनी मेनाशे समुदाय को बाइबिल में वर्णित “लॉस्ट ट्राइब” यानी खोई हुई जनजातियों में माना जाता है। बाइबिल के अनुसार, प्राचीन इजरायल 12 कबीलों में बंटा था, जिनमें से एक कबीला मेनाशे का था। समुदाय का दावा है कि वे इसी कबीले के वंशज हैं।
इतिहास के अनुसार, 722 ईसा पूर्व में असीरियाई साम्राज्य ने इजरायल पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद मेनाशे कबीले के लोग अपने मूल स्थान से विस्थापित हो गए। माना जाता है कि वे फारस (वर्तमान ईरान), अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन से होते हुए भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहुंचे और मणिपुर व मिजोरम में बस गए।
इजरायल के इमिग्रेशन मंत्री ओफिर सोफर ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “हम इतिहास रच रहे हैं, क्योंकि हम पूरे बनी मेनाशे समुदाय को इजरायल ला रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के बाद इससे बेहतर और भावनात्मक समय कोई नहीं हो सकता। घर में आपका स्वागत है।” यह मिशन न केवल एक आव्रजन कार्यक्रम है, बल्कि उन लोगों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी है, जो सदियों पहले अपने मूल स्थान से दूर हो गए थे।

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