द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच आयोजित शांति वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई, लेकिन इस दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने अभूतपूर्व स्तर की तैयारी की। उच्च-स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, संभावित खतरे को देखते हुए पाकिस्तान ने बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का सहारा लिया, ताकि किसी भी तरह की चूक न हो।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 अप्रैल की रात जब ईरान के विशेष विमान IRAN04 और IRAN05 इस्लामाबाद पहुंचने वाले थे, उससे पहले ही पाकिस्तान ने अपने दक्षिण-पश्चिमी हवाई क्षेत्र, खासकर अरब सागर के ऊपर, एक मजबूत सुरक्षा कवच सक्रिय कर दिया। इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, सर्विलांस रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सपोर्ट सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को आशंका थी कि इजरायल किसी तरह का हमला कर सकता है, क्योंकि वह पहले भी ईरान के कई शीर्ष नेताओं को निशाना बना चुका है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए ईरानी विमानों को हर संभव सुरक्षा देने की योजना बनाई गई।
इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान ने अपने एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमान को तैनात किया, जो लंबी दूरी से आने वाले किसी भी विमान या मिसाइल की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। इसके साथ ही ईरान के सीमावर्ती क्षेत्रों और अरब प्रायद्वीप तक इलेक्ट्रॉनिक निगरानी भी बढ़ा दी गई।
सबसे खास बात यह रही कि पाकिस्तान ने “एयर-मोबिलिटी डिसेप्शन” यानी हवाई छलावा रणनीति अपनाई। इसके तहत एक नागरिक एयरबस A-321 विमान को ईरानी विमानों के समानांतर उड़ाया गया, ताकि उनकी वास्तविक पहचान छिपाई जा सके। इतना ही नहीं, सुरक्षा कारणों से ईरानी विमानों के ट्रांसपोंडर और रडार सिग्नेचर भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए, जिससे उनकी लोकेशन सार्वजनिक फ्लाइट ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई न दे।
इसके अलावा, पाकिस्तानी वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान J-10C और JF-17 थंडर को भी तैनात किया गया, जो एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों से लैस थे। इन फाइटर जेट्स ने ईरानी विमानों को नजदीकी सुरक्षा प्रदान की और पूरे हवाई मार्ग पर उन्हें सुरक्षित इस्लामाबाद तक पहुंचाया।
बताया जा रहा है कि इन विमानों में ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और नेता सवार थे। ऐसे में उनकी सुरक्षा पाकिस्तान के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई थी।
हालांकि, इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बावजूद पाकिस्तान द्वारा अपनाई गई सुरक्षा रणनीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है और इसे एक हाई-लेवल डिफेंस ऑपरेशन के तौर पर देखा जा रहा है।
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