गुरुवार को ANI नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि AI केवल अवसर ही नहीं, बल्कि चुनौतियों का भी बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा, “जब हम सुरक्षा और प्रतिरोध की बात करते हैं, तो हमें AI के सकारात्मक पहलू के साथ-साथ उसके जोखिमों को भी समझना होगा। डीपफेक, साइबर युद्ध और ऑटोनॉमस हथियार प्रणाली जैसी तकनीकें नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं, जो भविष्य में और बढ़ेंगी।”
‘भस्मासुर’ जैसा खतरा
राजनाथ सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक शक्तिशाली AI मॉडल, जो बैंकिंग सिस्टम, अस्पतालों और पावर ग्रिड को सुरक्षित बना सकता है, वही अगर गलत हाथों में चला जाए तो इन व्यवस्थाओं को ध्वस्त भी कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमारी पौराणिक कथाओं में भस्मासुर को मिला वरदान अंततः उसके लिए ही खतरा बन गया था। AI भी कुछ वैसा ही है—सही उपयोग में वरदान, गलत उपयोग में विनाश।”
रक्षा क्षेत्र में AI की बढ़ती भूमिका
हालांकि, रक्षा मंत्री ने AI के सकारात्मक उपयोगों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बल AI, मशीन लर्निंग और बिग डेटा के जरिए अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहे हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम और सर्विलांस प्लेटफॉर्म्स में AI के उपयोग से सटीकता और प्रभावशीलता में काफी वृद्धि हुई है।
उन्होंने ‘सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम’ को भी AI के सफल उपयोग का उदाहरण बताया और कहा कि इस तरह की परियोजनाएं भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही हैं।
तकनीक से सुरक्षा और समृद्धि
राजनाथ सिंह ने कहा कि उभरती तकनीकों का सही उपयोग भारत को न केवल अधिक सुरक्षित बनाएगा, बल्कि उसे सशक्त और समृद्ध भी करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार AI के जिम्मेदार और संतुलित उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
आम जीवन में भी AI का बढ़ता उपयोग
रक्षा मंत्री ने बताया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम लोगों और पूर्व सैनिकों के जीवन को भी आसान बना रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए AI-सक्षम प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जिससे पूर्व सैनिकों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिली है।
अंत में उन्होंने कहा कि AI एक शक्तिशाली उपकरण है, जिसका उपयोग मानवता के हित में किया जाना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि इसके विकास और उपयोग के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा और नियामक ढांचा भी तैयार किया जाए, ताकि इसके संभावित खतरों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।