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राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को किया नामित, उज्ज्वल निकम और मीनाक्षी जैन शामिल

Published on: July 13, 2025
Rashtrapati murmu ne rajyasabha

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित नागरिकों को नामित किया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट सेवाओं और विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं। इन नामांकनों को पूर्व में मनोनीत सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त हुई सीटों की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है।

नामित व्यक्तियों में शामिल हैं:


1. उज्ज्वल देवराव निकम – प्रख्यात सरकारी वकील

उज्ज्वल निकम देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष का नेतृत्व कर चुके हैं। 1993 के मुंबई बम धमाके, अंजुमन इस्लाम कॉलेज गैंगरेप, और अजमल कसाब के मुकदमे जैसे मामलों में उनकी भूमिका निर्णायक रही। वे अपनी बेहतरीन न्यायिक क्षमता, न्यायप्रियता और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। उनका नामांकन न्यायपालिका और कानून व्यवस्था में उनके योगदान को मान्यता देने के रूप में देखा जा रहा है।


2. मीनाक्षी जैन – इतिहासकार एवं शिक्षाविद्

डॉ. मीनाक्षी जैन भारतीय इतिहास की प्रतिष्ठित विद्वान और लेखक हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुकी हैं और अनेक शोध आधारित पुस्तकों की लेखिका हैं, जिनमें प्राचीन भारत, मंदिरों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषय शामिल हैं। उनके शोध कार्यों ने इतिहास लेखन की नई दिशा प्रदान की है। उनका राज्यसभा में मनोनयन शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में योगदान को सम्मानित करता है।


3. हर्षवर्धन श्रृंगला – पूर्व विदेश सचिव

हर्षवर्धन श्रृंगला भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वे अमेरिका, थाईलैंड और बांग्लादेश में भारत के राजदूत रह चुके हैं। 2020 से 2022 तक उन्होंने भारत के विदेश सचिव के रूप में कार्य किया। अपने कार्यकाल में उन्होंने भारत की विदेश नीति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को सुदृढ़ बनाने में उनके अनुभव का लाभ अब संसद में मिलेगा।


4. सी. सदानंदन मास्टर – सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद्

केरल के सामाजिक कार्यकर्ता सदानंदन मास्टर शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में दशकों से कार्यरत हैं। उन्होंने आदिवासी और वंचित समुदायों के उत्थान हेतु अनेक प्रयास किए हैं। वे शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव लाने के प्रबल पक्षधर हैं। उनका नामांकन सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक योगदान को रेखांकित करता है।


संवैधानिक संदर्भ:
भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में विशेष योग्यता रखने वाले 12 सदस्यों को राज्यसभा में मनोनीत कर सकते हैं। इस बार जिन चार लोगों को मनोनीत किया गया है, वे सभी अपने-अपने क्षेत्रों में असाधारण कार्य कर चुके हैं।


निष्कर्ष:
राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा किए गए ये नामांकन संसद के उच्च सदन में विविध क्षेत्रों की विशेषज्ञता को प्रतिनिधित्व प्रदान करते हैं। इससे न केवल राज्यसभा की वैचारिक समृद्धि बढ़ेगी, बल्कि नीति-निर्माण में भी इन व्यक्तियों के अनुभव और दृष्टिकोण का प्रभाव देखने को मिलेगा। यह कदम संसद में ज्ञान, अनुभव और विविधता को समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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