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तस्लीमा नसरीन की अपील: अवामी लीग से प्रतिबंध हटे, शेख हसीना को लौटने दिया जाए

Published on: August 4, 2026
Taslima Nasrin's appeal

द  देवरिया न्यूज़,कोलकाता : निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश सरकार से अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की स्वदेश वापसी का रास्ता साफ करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

अवामी लीग पर प्रतिबंध को बताया अलोकतांत्रिक

रविवार को कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तस्लीमा नसरीन ने कहा कि शेख हसीना को जिस तरह सत्ता से हटाया गया और उनकी पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया गया, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को चुनाव लड़ने और जनता के बीच जाने का अवसर मिलना चाहिए।

“मैं चाहती हूं कि शेख हसीना बांग्लादेश वापस आएं। भले ही मैंने अतीत में उनकी आलोचना की हो, लेकिन अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने का मैं समर्थन नहीं करती।”

शेख हसीना की वापसी में सहयोग की अपील

तस्लीमा नसरीन ने मौजूदा बांग्लादेश सरकार से आग्रह किया कि वह शेख हसीना को देश लौटने और अपनी पार्टी का नेतृत्व करने का अवसर दे। उनके अनुसार, किसी भी नेता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार मिलना चाहिए।

गौरतलब है कि तस्लीमा नसरीन स्वयं भी वर्षों से निर्वासन का जीवन जी रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें अपने देश लौटने के लिए किसी प्रकार का निमंत्रण या आश्वासन नहीं मिला है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी रखी राय

नसरीन ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।

कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रभाव में कमी के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं, बल्कि स्थिति और गंभीर होती नजर आ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अवामी लीग मुख्य विपक्षी दल के रूप में मौजूद रहती तो लोकतांत्रिक संतुलन बेहतर होता।

हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

तस्लीमा नसरीन ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों को कई स्थानों पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। हालांकि, इन आरोपों पर बांग्लादेश सरकार की ओर से इस बयान के संदर्भ में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर दिया जोर

नसरीन ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेदों का समाधान चुनाव और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। उनके अनुसार, किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने के बजाय उसे जनता के बीच अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।



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