ईरान के मुताबिक, इस समझौते का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। हालांकि, समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य करने को लेकर अभी कुछ मुद्दे लंबित हैं और तेहरान ने इस मामले में अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
जून में हुआ था समझौता ज्ञापन
इस्माइल बघई ने बताया कि ईरान और ओमान ने 18 जून को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया था। इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत शुरू हुई। चर्चा में रक्षा, सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। बघई के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई और दोनों पक्ष शिपिंग रूट के मैप पर सहमत हो गए। हालांकि, संयुक्त बयान की भाषा समेत कुछ औपचारिक मुद्दों पर अभी काम किया जाना बाकी है।
सुरक्षित नेविगेशन पर समझौता
ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता मुख्य रूप से नेविगेशन और सुरक्षित समुद्री आवाजाही से जुड़ा है। तेहरान का कहना है कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के दावे या उसकी संप्रभुता की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और समुद्री अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अपनाता रहा है। वहीं, दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल होने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार के लिए भी काफी महत्व है।
अमेरिका की नाकेबंदी को लेकर ईरान की शर्त
रूट मैप पर सहमति बनने के बावजूद ईरान ने कहा है कि होर्मुज से सुरक्षित और सामान्य व्यावसायिक शिपिंग की पूर्ण बहाली अमेरिका के कदमों पर निर्भर करेगी। इस्माइल बघई ने अमेरिका के कथित कदमों और नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करने की मांग दोहराई। ईरान ने अमेरिका पर अपने वादों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग भी दोहराई है।
तेहरान का कहना है कि शिपिंग रूट को पूरी तरह सामान्य करने के लिए वॉशिंगटन को समझौता ज्ञापन के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने भी तनाव बढ़ाया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़े रुख का संकेत देते हुए होर्मुज को लेकर कई सख्त दावे किए हैं। ऐसे में ईरान और ओमान के बीच नेविगेशन रूट पर बनी सहमति को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, समझौते के बावजूद समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम होना और सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान जरूरी माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
ईरान और ओमान अब लंबित तकनीकी और औपचारिक मुद्दों को सुलझाने पर काम करेंगे। इसके बाद दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल, रूट मैप पर सहमति बनने के बाद अगली नजर अमेरिका के रुख पर है। यदि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच समुद्री सुरक्षा और नाकेबंदी से जुड़े विवादों पर सहमति बनती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।