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दिल्ली हाईकोर्ट की जज से जुड़े अवमानना मामले में सौरव दास समेत कई नेताओं को नोटिस, चार हफ्ते में मांगा जवाब

Published on: August 6, 2026
Delhi High Court Judge

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े आपराधिक अवमानना मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास सहित कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सोशल मीडिया अभियान को लेकर उठे सवाल

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ के समक्ष चल रही सुनवाई में आरोप लगाया गया कि संबंधित नेताओं ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाया। अदालत ने इन आरोपों पर सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हटाने का भी आरोप

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अशोक चैतन्य ने अदालत को बताया कि जिन सोशल मीडिया पोस्टों के आधार पर अवमानना का मामला दर्ज हुआ था, उनमें से कई पोस्ट बाद में हटा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि संबंधित व्यक्तियों ने पोस्ट डिलीट कर दिए, लेकिन उन्होंने पहले ही उनका डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित कर लिया था। अधिवक्ता ने अदालत से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अब यह डिजिटल सामग्री भी मामले की सुनवाई का हिस्सा बनेगी।

सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल को अभी तक वह पूरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिसके आधार पर अदालत ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की। अन्य पक्षों की ओर से भी इसी प्रकार की दलील दी गई। इस पर अदालत ने रजिस्ट्री को सभी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए सभी नोटिस प्राप्त पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा।

कैसे शुरू हुआ मामला

यह मामला 14 मई को उस समय शुरू हुआ था, जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे कथित अभियान का स्वतः संज्ञान लिया था। न्यायालय का कहना था कि कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से न्यायपालिका की गरिमा को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। इसके बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की और वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहूरा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।

सौरव दास ने आरोपों से किया इनकार

वहीं, सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने कोई भी पोस्ट या टिप्पणी हटाई नहीं है। उनका कहना है कि उनकी रिपोर्टिंग केवल आरटीआई से प्राप्त जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित थी। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हटाने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।

अगली सुनवाई 21 सितंबर को

दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है, जहां अदालत उपलब्ध दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगी।


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