सूत्रों के मुताबिक, 24 दिसंबर को चुनाव आयोग ने इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र भेजकर इस 4 सूत्री एजेंडे का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का 4-सूत्री प्लान
पहले बिंदु के तहत, जिन मामलों में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) ने मतदाताओं को पात्रता साबित करने के लिए नोटिस जारी किया है, उनसे जुड़े सभी अतिरिक्त दस्तावेज—जिसमें पिछले SIR में नाम होने का प्रमाण भी शामिल है—बीएलओ ऐप के जरिए अपलोड किए जाएंगे।
दूसरे बिंदु में कहा गया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को ईसीआईनेट (ECINET) पर दस्तावेज प्राप्त होने के पांच दिनों के भीतर उनका सत्यापन अनिवार्य रूप से करना होगा।
तीसरे बिंदु के अनुसार, यदि कोई दस्तावेज एक ही राज्य के किसी अन्य जिले से जारी हुआ है, तो संबंधित डीईओ उसे ईसीआईनेट के माध्यम से उस जिले के डीईओ को भेजेगा, जहां से दस्तावेज जारी हुआ है, ताकि उसका वेरिफिकेशन हो सके।
चौथे बिंदु में स्पष्ट किया गया है कि यदि दस्तावेज किसी दूसरे राज्य से जारी किया गया है, तो डीईओ इसे अपने राज्य के सीईओ को भेजेगा। इसके बाद सीईओ संबंधित राज्य के समकक्ष अधिकारी से तत्काल सत्यापन कराने का अनुरोध करेंगे।
नाम कटने की आशंका पर राहत
चुनाव आयोग के इस फैसले से खासतौर पर उन मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका नाम पिछले SIR में शामिल नहीं था और जिन्हें अब नोटिस भेजकर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। आयोग का मानना है कि तय समयसीमा में सत्यापन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक परेशानियां कम होंगी।
गौरतलब है कि SIR के दूसरे चरण में शामिल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 11 ने अपनी ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। उत्तर प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अभी जारी नहीं हुई है। इसके लिए 6 जनवरी 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।