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ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर, इंटरनेशनल सोलर अलायंस से हटने पर भारत के लिए नई चुनौती

Published on: January 9, 2026
Trump's big decision America 66
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने वैश्विक राजनीति और कूटनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने एक ही फैसले में 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से खुद को अलग कर लिया है। इनमें 31 संगठन संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से जुड़े हैं, जबकि 35 अन्य स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हैं। अमेरिका ने इस कदम को अपनी ‘यूएस फर्स्ट’ नीति का हिस्सा बताया है।
हालांकि, यह फैसला भारत के लिए खासा चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इन 66 संगठनों में इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भी शामिल है, जिसका नेतृत्व भारत कर रहा है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसके 120 सदस्य देश हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्लोबल साउथ के देशों की है। ISA के डायरेक्टर जनरल आशीष खन्ना हैं।
अमेरिका के इस संगठन से बाहर निकलने के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या चीन इस खाली जगह को भरने की कोशिश करेगा। दरअसल, चीन पहले भी इंटरनेशनल सोलर अलायंस में शामिल होने की इच्छा जता चुका है और भारत ने भी साफ किया है कि चीन की सदस्यता पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।

अमेरिका के जाने से फंडिंग की कमी

अटकलें इसलिए भी तेज हो गई हैं, क्योंकि साल 2022 से 2025 के बीच अमेरिका ने ISA के विकास के लिए करीब 2.1 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 18 करोड़ 87 लाख रुपये का योगदान दिया था। अमेरिका के बाहर निकलने से इस फंडिंग में आई कमी को पूरा करने के लिए संगठन को किसी बड़े वैश्विक खिलाड़ी की जरूरत पड़ेगी, जिसमें चीन एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

सोलर एनर्जी में चीन की बढ़ती भूमिका

साल 2025 में ISA के डायरेक्टर जनरल आशीष खन्ना ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपोर्टर चीन इंटरनेशनल सोलर अलायंस की प्राथमिकताओं को समझने में गहरी रुचि दिखा रहा है। उन्होंने बताया था कि इस संबंध में चीनी दूतावास के साथ बैठक भी हुई थी। खन्ना ने स्पष्ट किया था कि चीन सहित सभी देशों का ISA का सदस्य बनने के लिए स्वागत है।
उन्होंने यह भी कहा था कि भारत का प्रमुख फोकस अफ्रीका महाद्वीप पर है, जहां करीब 68 करोड़ लोगों के पास अब भी ऊर्जा की पहुंच नहीं है, जबकि भुगतान की सफलता दर 98-99 प्रतिशत है। खन्ना के अनुसार, रियायती फंडिंग की मौजूदा कमी को पूरा करने के लिए 300 से 400 प्रतिशत तक अधिक फंडिंग जुटाने की जरूरत है।

तेल कंपनियों को बढ़ावा देने की नीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का इंटरनेशनल सोलर अलायंस से बाहर निकलना डोनाल्ड ट्रंप की ऊर्जा नीति से जुड़ा है। ट्रंप पर आरोप लगते रहे हैं कि वह अमेरिका की तेल कंपनियों को प्राथमिकता देते हैं। यदि सोलर एनर्जी और नवीकरणीय ऊर्जा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलता है, तो यह पारंपरिक तेल उद्योग के लिए चुनौती बन सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने इस समूह से खुद को अलग करने का फैसला लिया है।
कुल मिलाकर, अमेरिका के इस कदम से न केवल इंटरनेशनल सोलर अलायंस की रणनीति पर असर पड़ेगा, बल्कि भारत के नेतृत्व वाले इस संगठन में चीन की संभावित भूमिका को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।

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