द देवरिया न्यूज़,तेहरान : खाड़ी देशों पर हमलों को लेकर ईरान के अंदर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पड़ोसी देशों से टकराव नहीं चाहता, लेकिन हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर है।
दरअसल शनिवार को पेजेश्कियान ने खाड़ी देशों पर हमले रोकने की बात कही थी और उनसे माफी भी मांगी थी। उनके इस बयान के बाद तेहरान में राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने राष्ट्रपति के बयान से अलग रुख अपनाते हुए हमले जारी रखे, जिससे सरकार के भीतर मतभेद की चर्चा तेज हो गई।
“दुश्मनों ने बयान का गलत मतलब निकाला”
रविवार को राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा,
“मेरी बातों का दुश्मनों ने गलत मतलब निकाला है। वे हमारे पड़ोसी देशों के साथ हमारे रिश्तों में दरार डालना चाहते हैं। हम हमेशा कहते आए हैं कि पड़ोसियों के साथ हमारे अच्छे संबंध होने चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए हमलों का जवाब देने को मजबूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी पड़ोसी देश से दुश्मनी चाहता है या उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहता है।
पहले मांगी थी माफी
शनिवार को टेलीविजन पर प्रसारित एक संदेश में पेजेश्कियान ने कहा था कि ईरान का पड़ोसी देशों को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा था,
“मुझे उन पड़ोसी देशों से माफी मांगनी चाहिए, जिन पर हमले हुए हैं। हमारा मकसद उन्हें नुकसान पहुंचाना नहीं है। जब तक उस तरफ से हमला नहीं होगा, हम भी कोई हमला नहीं करेंगे।”
राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ईरान के न्यायपालिका प्रमुख और IRGC के अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संकेत दिया कि देश की सैन्य रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके बाद भी ईरानी सेना ने खाड़ी क्षेत्र में हमले जारी रखे।
ईरान में दो धड़े होने की चर्चा
राष्ट्रपति के बयान और सेना की कार्रवाई के बीच विरोधाभास ने ईरान की सत्ता के भीतर मतभेद की चर्चा को हवा दे दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर ईरान के नेतृत्व में अलग-अलग राय सामने आ रही हैं और राष्ट्रपति पर भारी दबाव भी हो सकता है।
खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव
28 फरवरी से इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के अलावा खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में स्थित अमेरिकी बेसों पर हमले किए हैं। इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है और क्षेत्र में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई है।
युद्ध में भारी नुकसान
इजरायल और अमेरिका के हमलों से ईरान को भारी नुकसान हुआ है। एक सप्ताह से जारी इस संघर्ष में बड़ी संख्या में इमारतें और बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक इस लड़ाई में अब तक ईरान में 1500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 165 स्कूली छात्राएं भी शामिल बताई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष इसी तरह जारी रहा तो पूरे पश्चिम एशिया में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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