ढाका में अपने विदाई संबोधन के दौरान प्रणय वर्मा ने कहा कि भारत और बांग्लादेश पहले की तुलना में अधिक सक्षम, अधिक आत्मविश्वासी और अधिक जुड़े हुए समाज बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। ऐसे में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय चुनौतियों और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों से निपटने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर दोनों देशों को क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान परिस्थितियां अतीत से काफी अलग हैं और इसी वजह से दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उनके अनुसार यह नया एजेंडा दोनों देशों की नई क्षमताओं, नई आकांक्षाओं और राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के मजबूत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत हैं।
प्रणय वर्मा ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आपसी सम्मान, साझा हितों और सहयोग की भावना पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश की भौगोलिक निकटता किसी बोझ की तरह नहीं बल्कि एक बड़ी पूंजी है, जिसे दोनों देशों को अवसरों में बदलना चाहिए। उनका मानना है कि अगर दोनों देश मिलकर काम करें तो व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
अपने कार्यकाल के समापन पर वर्मा ने कहा कि वह अब बेल्जियम और यूरोपीय संघ में भारत के राजदूत के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेश में मिले सहयोग और अनुभवों को याद करते हुए कहा कि वह भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं। उन्होंने कहा, “एक समृद्ध बांग्लादेश भारत के हित में है, और एक समृद्ध भारत बांग्लादेश के हित में है।”
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनने के बाद ढाका में भारत विरोधी रुख की चर्चा हुई थी। हालांकि, इस वर्ष फरवरी में हुए चुनावों के बाद बीएनपी नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में नए प्रयास शुरू हुए हैं।
भारत लगातार बांग्लादेश के साथ सहयोग और संवाद को मजबूत करने पर जोर देता रहा है। वहीं बांग्लादेश की ओर से भी भारत के साथ सकारात्मक और संतुलित संबंध बनाए रखने की इच्छा जताई गई है। ऐसे समय में प्रणय वर्मा का यह संदेश दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।