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भारत की मिसाइल ताकत से पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी, CISS ने शहबाज सरकार को दी चेतावनी

Published on: May 19, 2026
Pakistan with India's missile power

द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : भारत के लगातार हो रहे मिसाइल परीक्षणों ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान के रणनीतिक मामलों के थिंक टैंक सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ (CISS) ने बंगाल की खाड़ी में भारत की बढ़ती मिसाइल गतिविधियों को लेकर शहबाज शरीफ सरकार को सतर्क रहने की सलाह दी है।

थिंक टैंक के अनुसार भारत तेजी से अपनी रणनीतिक, सामरिक और नौसैनिक मिसाइल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट में खास तौर पर अग्नि-5 (MIRV) और K-4 पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षणों का जिक्र किया गया है। CISS का दावा है कि ये परीक्षण दक्षिण एशिया के सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि भारत इन कार्यक्रमों को अपनी “क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस” नीति का हिस्सा बताता रहा है।

बंगाल की खाड़ी में बढ़ी गतिविधियां

CISS ने कहा कि भारत की ओर से जारी नया NOTAM यह संकेत देता है कि नई दिल्ली अपनी मिसाइल परीक्षण और ऑपरेशनल क्षमता को लगातार विस्तार दे रही है। पाकिस्तान का मानना है कि बंगाल की खाड़ी अब भारत के लिए एडवांस मिसाइल परीक्षण का अहम केंद्र बन चुकी है।

थिंक टैंक ने यह भी कहा कि भारत बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और एंटी-शिप मिसाइल तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

ब्रह्मोस और लंबी दूरी की क्षमता पर नजर

रिपोर्ट में भारत की ब्रह्मोस मिसाइल और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता का भी उल्लेख किया गया है। CISS के मुताबिक भारत की समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और आधुनिक मिसाइल तकनीक दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरण बदल सकती है।

DRDO के नेतृत्व में तेज हुआ विकास

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में DRDO के नेतृत्व में कई आधुनिक मिसाइल प्रणालियों का सफल परीक्षण किया है। इनमें अग्नि श्रृंखला, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर और पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली रणनीतिक मिसाइलें शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मौजूद परीक्षण सुविधाओं के कारण बंगाल की खाड़ी भारत के लिए मिसाइल परीक्षण का प्रमुख क्षेत्र बन गई है।

हथियारों की होड़ से बचने की अपील

CISS ने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में मिसाइल आधुनिकीकरण की रफ्तार इसी तरह बढ़ती रही तो सैन्य प्रतिस्पर्धा और तनाव और बढ़ सकता है। थिंक टैंक ने दक्षिण एशियाई देशों से संवाद और स्थिरता को प्राथमिकता देने की अपील की है, ताकि किसी भी संभावित टकराव या गलत आकलन से बचा जा सके।


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