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नेपाल में बड़ा शिक्षा सुधार: स्कूल-कॉलेज में राजनीति पर बैन, 5वीं तक खत्म होंगी परीक्षाएं

Published on: March 30, 2026
Major education reform in Nepal

द  देवरिया न्यूज़,काठमांडू : नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद शासन सुधारों के तहत 100 सूत्रीय एजेंडा पेश किया है, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की घोषणा की गई है। इन सुधारों का उद्देश्य शिक्षा को अधिक समावेशी, छात्र-केंद्रित और गुणवत्ता आधारित बनाना है। साथ ही, स्कूल और विश्वविद्यालय परिसरों को राजनीति से मुक्त करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

35 वर्षीय बालेंद्र शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पद संभालते ही उन्होंने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में शिक्षा सुधारों को लेकर कई अहम फैसले किए।

सरकार के फैसले के तहत अब नेपाल के स्कूलों और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों पर रोक लगा दी गई है। प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने ऐसे संगठनों को तय समय-सीमा के भीतर कैंपस खाली करने का आदेश दिया है।

छात्रों के प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए सरकार ने 90 दिनों के भीतर गैर-राजनीतिक “छात्र परिषदों” के गठन की योजना बनाई है। इन परिषदों का उद्देश्य बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के छात्रों की आवाज को सामने लाना होगा। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रशासन को पूरी तरह राजनीति-मुक्त बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के राजनीतिक दलों से जुड़े रहने पर रोक लगेगी और पक्षपातपूर्ण ट्रेड यूनियनों को समाप्त किया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार ही परीक्षाओं के परिणाम घोषित करें, ताकि अनियमितता और देरी को रोका जा सके। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अब नागरिकता प्रमाणपत्र की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है।

स्कूल स्तर पर भी बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने 5वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए पारंपरिक परीक्षाओं को खत्म करने का फैसला किया है। अब छात्रों का मूल्यांकन वैकल्पिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से किया जाएगा, जिससे उन्हें तनाव-मुक्त और समग्र शिक्षा का माहौल मिल सके।

बालेंद्र शाह का यह कदम नेपाल की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य छात्रों के हितों को केंद्र में रखते हुए एक बेहतर और निष्पक्ष शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।



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