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डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर मेनका गांधी बोलीं- कुत्तों को हटाना नहीं, ABC कार्यक्रम का सही क्रियान्वयन ही स्थायी समाधान

Published on: July 5, 2026
On increasing incidents of dog bites

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। देशभर में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की बढ़ती घटनाओं और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने कहा है कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान उन्हें हटाने में नहीं, बल्कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम को वैज्ञानिक और प्रभावी ढंग से लागू करने में है। उनका कहना है कि यदि पिछले दो दशकों में नसबंदी और रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम को गंभीरता से लागू किया गया होता, तो आज हालात काफी अलग होते।

‘कुत्तों को हटाना व्यावहारिक समाधान नहीं’

मेनका गांधी ने कहा कि रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल और सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने की बात व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन कुत्तों को वहां से हटाया जाता है, तो उन्हें आखिर कहां रखा जाएगा। यदि उन्हें किसी दूसरी कॉलोनी या सड़क पर छोड़ दिया जाए, तो वहां रहने वाले लोगों, विशेषकर गरीब तबके, पर इसका सीधा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, समस्या का समाधान स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि आबादी नियंत्रण और बेहतर प्रबंधन है।

ABC कार्यक्रम के सही क्रियान्वयन पर दिया जोर

मेनका गांधी ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम वर्ष 2001 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना और रेबीज जैसी बीमारियों पर रोक लगाना था। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में यदि इस योजना को ईमानदारी, वैज्ञानिक तरीके और पर्याप्त संसाधनों के साथ लागू किया गया होता, तो आज देश में डॉग बाइट की घटनाएं काफी कम होतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई नगर निगमों और स्थानीय निकायों में सीमित बजट तथा कमजोर निगरानी के कारण यह कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका।

कुछ एनजीओ पर लगाए गंभीर आरोप

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कई स्थानों पर ABC कार्यक्रम के संचालन में गंभीर अनियमितताएं देखने को मिली हैं। उनके अनुसार, कुछ संस्थाओं ने रिकॉर्ड में वास्तविक संख्या से अधिक नसबंदी दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में बिना प्रशिक्षित और आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव वाले संगठनों को ठेके दिए गए, जहां प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों के बजाय अन्य कर्मचारियों से ऑपरेशन कराए जाने की शिकायतें सामने आईं।

कुत्तों को दूसरी जगह छोड़ना बढ़ा सकता है खतरा

मेनका गांधी के अनुसार, नसबंदी के बाद कुत्तों को उनकी मूल जगह पर वापस छोड़ने के बजाय दूसरी जगह छोड़ देना गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि नया इलाका कुत्तों के लिए असुरक्षित होता है, जहां उन्हें भोजन और रहने की जगह के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इससे उनका व्यवहार आक्रामक हो सकता है और डॉग बाइट की घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।

RWA और पशु प्रेमियों के बीच विवाद का समाधान बताया

कॉलोनियों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और कुत्तों को भोजन कराने वाले लोगों के बीच होने वाले विवादों पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक कॉलोनी में आपसी सहमति से एक निर्धारित स्थान तय किया जाना चाहिए, जहां आवारा कुत्तों को भोजन कराया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था कानून के अनुरूप भी है और स्थानीय प्रशासन, आरडब्ल्यूए तथा नागरिकों के सहयोग से विवादों को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है।

एनिमल वेलफेयर बोर्ड को मजबूत करने की जरूरत

मेनका गांधी ने सुझाव दिया कि सरकार को एनिमल वेलफेयर बोर्ड को अधिक मजबूत बनाना चाहिए तथा ABC कार्यक्रम संचालित करने वाले सभी संगठनों के लिए प्रशिक्षण और जवाबदेही अनिवार्य करनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि निगरानी व्यवस्था मजबूत हो और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो अगले दो वर्षों में डॉग बाइट की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

आक्रामक कुत्तों की पहचान पर क्या कहा

आक्रामक कुत्तों के संबंध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई कुत्ता बिना उकसावे के तीन बार किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसे निगरानी में रखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि “आक्रामक” शब्द का इस्तेमाल सोच-समझकर और उचित मानकों के आधार पर किया जाना चाहिए।

विदेशी नस्लों की बजाय भारतीय इंडी कुत्तों को अपनाने की सलाह

पालतू कुत्तों को लेकर मेनका गांधी ने कहा कि लोगों को विदेशी नस्लों की बजाय भारतीय इंडी (Indie) नस्ल के कुत्तों को अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके पास भी भारतीय नस्ल के कुत्ते हैं और वे लंबे समय से इन्हें अपनाने के पक्ष में रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ वर्ष पहले सरकार ने कुछ विदेशी आक्रामक नस्लों की बिक्री पर रोक लगाने की पहल की थी, लेकिन कानूनी कारणों से वह पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।

‘मानव सुरक्षा और पशु कल्याण साथ-साथ संभव’

मेनका गांधी ने अंत में कहा कि जिन परिवारों ने डॉग बाइट की घटनाओं में अपने प्रियजनों को खोया है, उनकी पीड़ा को समझना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मानव सुरक्षा और पशु कल्याण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार, स्थायी समाधान टकराव या हिंसक उपायों में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रबंधन, जिम्मेदारी, कानून के पालन और समाज के सामूहिक सहयोग में निहित है।


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