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पीओके में बढ़ा बवाल: छापेमारी के बाद भड़का जनाक्रोश, JAAC ने शहबाज और असीम मुनीर से की कार्रवाई की मांग

Published on: July 10, 2026
Uproar in PoK Raids

द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। करीब एक महीने से जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सेना और रेंजर्स बल प्रयोग के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।

CNN-News18 की रिपोर्ट के अनुसार, पीओके के टट्टा पानी इलाके में पाकिस्तान रेंजर्स और पुलिस द्वारा की गई ताजा छापेमारी के बाद तनाव और बढ़ गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों को भी हिरासत में लिया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने टट्टा पानी पुलिस स्टेशन का घेराव कर विरोध दर्ज कराया।

पुलिस पर लगाए बर्बरता के आरोप

ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान पुलिस पर बर्बरता, मनमानी गिरफ्तारियां और गैर-कानूनी छापेमारी करने के आरोप लगाए हैं। स्थानीय निवासी मसूद खालिद ने दावा किया कि उनके घर पर हुई छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों ने परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया, जिससे घर की महिलाएं और बच्चे सदमे में हैं। कमेटी का कहना है कि गैर-कानूनी हिरासत और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन से क्षेत्र की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

JAAC ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और स्वतंत्र जांच कराने की अपील की है। कमेटी ने कहा कि मानवाधिकार उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

JAAC ने अपने बयान में कहा, “हमारा आंदोलन पाकिस्तान या उसके संस्थानों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन सैन्य और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ है जिन्होंने कथित तौर पर नागरिकों के साथ गलत व्यवहार किया है। यदि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में गंभीर मानवीय संकट पैदा हो सकता है।”

शहबाज शरीफ और असीम मुनीर को भेजा पत्र

कमेटी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को अलग-अलग पत्र लिखकर 4 जून के बाद हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार सैन्य और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। JAAC ने रावलकोट, मीरपुर, कोटली और पीओके के अन्य क्षेत्रों में नागरिकों की मौत तथा कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों पर मुकदमा चलाने तथा 4 जून के बाद लागू किए गए सभी विवादित सरकारी आदेशों को वापस लेने की मांग भी की है।

महंगाई और आरक्षित सीटों के मुद्दे से शुरू हुआ आंदोलन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में यह आंदोलन महंगाई और विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय सरकार और सेना ने सख्त कार्रवाई की, जिसके बाद आंदोलन और व्यापक हो गया।

नोट: इस खबर में छापेमारी, हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े आरोप JAAC और मीडिया रिपोर्टों के हवाले से हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।



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