द देवरिया न्यूज़,अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित दान गबन और अनियमितताओं के मामले में हर दिन नए दावे और आरोप सामने आ रहे हैं। पूर्व लेखाकार महिपाल के बाद अब खुद को ट्रस्ट का पूर्व इंजीनियर बताने वाले दीनानाथ वर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर निर्माण और सप्लाई कार्यों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया है।
दीनानाथ वर्मा का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी शिकायत दी थी। उनका कहना है कि शिकायत के बाद उन्हें पहले गणना कक्ष में भेज दिया गया और बाद में सेवा से मुक्त कर दिया गया।
महंत शशिकांत दास ने कहा- जांच का इंतजार करें
इन आरोपों के बीच सरयू नित्य आरती के प्रमुख महंत शशिकांत दास ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें दीनानाथ वर्मा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इस पूरे विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
महंत ने कहा, “मैं तो यह भी नहीं जानता कि दीनानाथ कौन हैं। ट्रस्ट के अधिकारियों और महासचिव के अनुरोध पर हमने प्रशासनिक कार्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। इसके अलावा मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।”
मुख्यमंत्री योगी के बयान का किया समर्थन
महंत शशिकांत दास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि कुछ लोग शुरू से ही अयोध्या, राम मंदिर और भगवान राम के कार्यों का विरोध करते रहे हैं। ऐसे लोगों को मंदिर और भगवान राम के खिलाफ टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो कहा है, वह उचित है और इस मामले में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए।
“दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा”
महंत ने कहा कि ट्रस्ट के अनुरोध पर ही विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है और जांच प्रक्रिया जारी है। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि कुछ समय बाद सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा, “कौन सही है, कौन गलत है, किसने क्या किया है, यह जांच में स्पष्ट हो जाएगा। अभी किसी पर आरोप लगाना या किसी के पक्ष-विपक्ष में खड़ा होना उचित नहीं है।”
दोषियों को मिलेगा दंड
महंत शशिकांत दास ने कहा कि यदि किसी ने वास्तव में कोई गलत कार्य किया है तो उसे कानून और ईश्वर दोनों के सामने जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा, “अगर आपको भगवान राम और सनातन धर्म पर विश्वास है, तो यह भी विश्वास रखिए कि जो दोषी होगा, उसे दंड अवश्य मिलेगा। यदि कानून नहीं देगा तो ईश्वर जरूर देगा।”
एसआईटी ने दीनानाथ वर्मा से मांगे सबूत
इस बीच, आरोप लगाने वाले पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा को एसआईटी ने अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया है। दीनानाथ वर्मा का कहना है कि शुक्रवार को एसआईटी से जुड़े अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर आरोपों से संबंधित दस्तावेज और प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा।
उन्होंने एसआईटी के सामने उपस्थित होने की सहमति जताई है, लेकिन साथ ही सुरक्षा की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाती है तो वे जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होकर सभी तथ्य और सबूत प्रस्तुत करेंगे।
जांच पर टिकी निगाहें
राम मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर अब सबकी निगाहें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं। जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी रहने की संभावना है। वहीं प्रशासन और ट्रस्ट से जुड़े लोग लगातार यही कह रहे हैं कि अंतिम सत्य जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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