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राबड़ी देवी के सरकारी आवास विवाद के बीच फिर चर्चा में आया पुराना राजनीतिक किस्सा, लालू-नीतीश रिश्तों की कहानी

Published on: June 3, 2026
Rabri Devi's government residence controversy

द  देवरिया न्यूज़,पटना : बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली करने को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य की राजनीति का एक पुराना अध्याय फिर चर्चा में आ गया है। जहां राष्ट्रीय जनता दल (राजद) एनडीए सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगा रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में 1990 के दशक से जुड़ी उन घटनाओं का भी जिक्र हो रहा है, जिनमें तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के रिश्तों में आई दूरी की चर्चा होती रही है।

वीपी सिंह सरकार गिरने के बाद पटना लौटे थे नीतीश कुमार

1989 में बाढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए नीतीश कुमार वीपी सिंह सरकार में कृषि राज्य मंत्री बने थे। लेकिन 1990 में केंद्र सरकार गिरने के बाद वह सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति में समय देने लगे।

उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और दोनों नेताओं को एक-दूसरे का करीबी सहयोगी माना जाता था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू यादव के मुख्यमंत्री बनने में भी नीतीश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

रिश्तों में आई दूरी

राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू यादव और नीतीश कुमार के संबंधों में धीरे-धीरे खटास आने लगी। कहा जाता है कि शासन और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर दोनों नेताओं के विचार अलग होने लगे थे।

इसी दौर से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ने की बातें सामने आने लगीं, जो बाद में बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का कारण बनीं।

स्टेट गेस्ट हाउस को लेकर भी हुई थी चर्चा

कुछ राजनीतिक संस्मरणों और चर्चित कथनों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद पटना लौटे नीतीश कुमार ने सरकारी आवास की व्यवस्था को लेकर प्रयास किए थे। हालांकि उन्हें अपेक्षित सुविधा नहीं मिली और बाद में उन्होंने अपने परिचितों की मदद से रहने की व्यवस्था की।

इन घटनाओं को लेकर समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने अलग-अलग दावे किए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

मित्र के घर से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

बताया जाता है कि बाद के वर्षों में नीतीश कुमार पटना के बोरिंग रोड क्षेत्र में अपने एक मित्र के फ्लैट में रहने लगे। यहीं से उन्होंने बिहार की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी और जनता दल (यूनाइटेड) तथा एनडीए के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे।

2005 में बदला राजनीतिक परिदृश्य

नवंबर 2005 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिला और नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद बिहार की सत्ता में बड़ा बदलाव आया और लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर प्रभाव रखने वाले लालू प्रसाद यादव विपक्ष की भूमिका में चले गए।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि 1990 के दशक में शुरू हुई लालू-नीतीश की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा ने बिहार की राजनीति की दिशा बदल दी।

राबड़ी आवास विवाद से फिर ताजा हुई चर्चा

वर्तमान में 10, सर्कुलर रोड आवास को लेकर जारी विवाद के बीच इन पुराने राजनीतिक प्रसंगों का उल्लेख फिर से किया जा रहा है। हालांकि राजद और जदयू-भाजपा गठबंधन इस मुद्दे को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। फिलहाल सरकारी आवास को लेकर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं, जबकि राजनीतिक बयानबाजी भी तेज बनी हुई है।


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