द देवरिया न्यूज़,लखनऊ : पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को सभी बूथों पर पुनर्मतदान कराने के चुनाव आयोग के फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए इसे पूरी तरह संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप बताया है।
संजय निषाद ने कहा कि भारतीय संविधान में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का स्पष्ट प्रावधान है। यदि किसी क्षेत्र में चुनाव के दौरान अनियमितताएं या गड़बड़ियां सामने आती हैं, तो वहां दोबारा मतदान कराना जरूरी हो जाता है। उनका कहना था कि इस तरह के कदम लोकतंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए 242 अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की तैनाती के फैसले का भी समर्थन किया। निषाद ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था है, जिसका दायित्व पूरी चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी ढंग से संपन्न कराना है। आदर्श आचार संहिता लागू होने से लेकर मतगणना और परिणाम घोषित होने तक की जिम्मेदारी आयोग के पास होती है।
वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। निषाद ने कहा कि देश में जनता सर्वोच्च है और चुनाव के समय वही अंतिम निर्णय देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस कई महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करने में विफल रही। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि संशोधनों के जरिए प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, तो उसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने भी कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच महिलाओं के सशक्तीकरण के खिलाफ रही है। राजभर के अनुसार, वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, जबकि वर्तमान केंद्र सरकार के नेतृत्व में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को लेकर विश्वास जताया कि भारतीय जनता पार्टी वहां भी मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि पार्टी आगामी परिणामों में बेहतर प्रदर्शन करेगी और प्रचंड बहुमत के साथ आगे बढ़ेगी।
फलता में पुनर्मतदान को लेकर जहां एक ओर चुनाव आयोग की भूमिका पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
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