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समुद्र में नई जंग की आहट: अमेरिका ने उतारी बिना क्रू वाली ड्रोन बोट्स, बढ़ा तनाव

Published on: March 28, 2026
Sound of new war in the sea
द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन : ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने समुद्र में अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाते हुए बिना क्रू वाली ड्रोन स्पीडबोट्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह पहली बार है जब अमेरिका ने किसी सक्रिय संघर्ष में इन अत्याधुनिक समुद्री ड्रोन के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि की है।
पेंटागन के मुताबिक, इन ड्रोन बोट्स का उपयोग निगरानी के साथ-साथ हमले के लिए भी किया जा सकता है। इन्हें ‘कामिकाजी’ मिशन यानी आत्मघाती हमलों के प्लेटफॉर्म के रूप में भी तैनात किया जा सकता है। माना जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के साथ जारी तनातनी के बीच अमेरिका अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत तैनाती

पेंटागन के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बताया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत इन ड्रोन बोट्स को तैनात किया गया है। ये बोट्स अब तक 450 घंटे से ज्यादा समुद्र में गश्त कर चुकी हैं और 2200 समुद्री मील की दूरी तय कर चुकी हैं। यह अमेरिका की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वह बिना क्रू वाले जहाजों का एक मजबूत बेड़ा तैयार करना चाहता है।

क्या है GARC सिस्टम?

अमेरिका जिन ड्रोन बोट्स का इस्तेमाल कर रहा है, उन्हें Global Autonomous Reconnaissance Craft (GARC) कहा जाता है। ये हाई-स्पीड, स्वचालित और रिमोट कंट्रोल दोनों तरह से संचालित हो सकती हैं।
इनकी खासियतें:
  • खुफिया जानकारी जुटाने (ISR) में सक्षम
  • समुद्री सुरक्षा और निगरानी मिशन में उपयोगी
  • बारूदी सुरंगों का पता लगाने में मददगार
  • जरूरत के हिसाब से तेजी से मिशन के लिए तैयार
इनका निर्माण अमेरिका के बाल्टीमोर स्थित शिपयार्ड में किया जाता है और ये कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी काम करने में सक्षम हैं।

समुद्री ड्रोन का बढ़ता खतरा

हाल के वर्षों में समुद्री ड्रोन का महत्व तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन ने जहां रूस के खिलाफ इनका प्रभावी इस्तेमाल किया, वहीं ईरान भी तेल टैंकरों पर हमलों में इनका उपयोग कर चुका है। ऐसे में अमेरिका की यह नई तैनाती समुद्री संघर्ष को और जटिल बना सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इन ड्रोन बोट्स की मौजूदगी आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर बड़ा असर डाल सकती है।

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