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‘चिकन नेक’ की सुरक्षा में भूटान की बड़ी भूमिका, भारतीय मीडिया सच नहीं बताता: भूटानी एक्सपर्ट

Published on: May 10, 2026
Bhutan under protection of ‘chicken neck’
द  देवरिया न्यूज़,थिम्फू। भारत के रणनीतिक रूप से बेहद अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ को लेकर भूटान के वरिष्ठ पत्रकार और रक्षा विशेषज्ञ तेनजिंग लामसांग ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अक्सर भूटान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का जिक्र करता है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि बदले में भूटान भारत को कितनी बड़ी रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

‘द भूटानीज’ के संपादक तेनजिंग लामसांग ने एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि भारत को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला सिलीगुड़ी कॉरिडोर बेहद संवेदनशील इलाका है। चीन और पाकिस्तान जैसे देश इसे भारत की कमजोरी के तौर पर देखते हैं, लेकिन भूटान इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि भूटान की करीब 600 किलोमीटर लंबी सीमा भारत के इसी रणनीतिक कॉरिडोर के पास स्थित है। एक मित्र राष्ट्र के रूप में भूटान यह सुनिश्चित करता है कि किसी बाहरी शक्ति को इस क्षेत्र में दखल का मौका न मिले। उन्होंने कहा कि भूटान भारत विरोधी ताकतों और उग्रवादी संगठनों को भी इस इलाके में सक्रिय होने से रोकता है।

लामसांग ने याद दिलाया कि ULFA, NDFB और KLO जैसे पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी संगठनों ने कभी भूटान के जंगलों में अपने ठिकाने बना लिए थे। इसके बाद दिसंबर 2003 में भूटान के चौथे राजा ने खुद सेना का नेतृत्व करते हुए बड़ा अभियान चलाया था। इस कार्रवाई में करीब 160 उग्रवादी मारे गए थे और 500 से ज्यादा को गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने कहा कि भूटान भारत को पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक गहराई प्रदान करता है और विरोधी तत्वों को असम, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की ओर घुसपैठ से रोकने में मदद करता है। उनके मुताबिक, भारत सरकार भी भूटान को अपनी पूर्वी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।

चीन के साथ संबंधों को लेकर भी लामसांग ने अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भूटान ने डोकलाम और जोम्पेलरी रिज जैसे रणनीतिक इलाकों को चीन को देने से इनकार कर दिया, जबकि चीन ने बदले में दोगुनी जमीन की पेशकश की थी। भूटान ने यह फैसला भारत की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया।

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में भूटान ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसने अब तक चीन के साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं। इसके अलावा भूटान चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) का भी हिस्सा नहीं बना है।

लामसांग के मुताबिक, जहां दक्षिण एशिया के कई देश भारत और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं, वहीं भूटान लगातार भारत के साथ मैत्रीपूर्ण और भरोसेमंद संबंध बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत और भूटान के बीच सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग दशकों पुराना है और दोनों देश सीमा निगरानी व उग्रवादी गतिविधियों पर मिलकर काम करते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि भूटान एकमात्र ऐसा विदेशी देश है, जहां भारतीय सेना की मौजूदगी है। साथ ही भूटान की नदियां भारत में बहती हैं, जो असम और पश्चिम बंगाल में बाढ़ नियंत्रण, जल प्रबंधन और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।


इसे भी पढ़ें : भारत-पाकिस्तान व्यापार लगभग ठप, दवाओं के लिए अब भी भारत पर निर्भर पाकिस्तान

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