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इजरायल-लेबनान तनाव फिर चरम पर, हिज्बुल्लाह के साथ संघर्ष ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

Published on: April 14, 2026
Israel-Lebanon tension again
द  देवरिया न्यूज़,बेरूत : इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हिज्बुल्लाह और इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के बीच लगातार हो रहे हमलों ने न केवल सीमा क्षेत्रों को अस्थिर कर दिया है, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए नाजुक युद्धविराम पर भी खतरा पैदा कर दिया है। हालिया हमलों में भारी जनहानि हुई है और कूटनीतिक प्रयासों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

संघर्ष की जड़ें कितनी पुरानी हैं?

इजरायल और लेबनान के बीच तनाव की शुरुआत 1948 से मानी जाती है, जब इजरायल के गठन के बाद लेबनान ने अन्य अरब देशों के साथ मिलकर इसका विरोध किया। तब से अब तक दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हो सका है। 1975 से 1990 तक चले लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान हालात और बिगड़े, जब इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप किया।

2006 का युद्ध क्यों अहम था?

साल 2006 में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच बड़ा युद्ध हुआ, जो करीब एक महीने तक चला। हिज्बुल्लाह के हमलों के जवाब में इजरायल ने व्यापक सैन्य कार्रवाई की, लेकिन हिज्बुल्लाह ने भी मजबूत प्रतिरोध दिखाया। इस युद्ध के बाद सीमा पर तनाव स्थायी रूप से बना रहा।

2023 के बाद क्यों बढ़ा तनाव?

अक्टूबर 2023 में हमास-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद हिज्बुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ हमले तेज कर दिए। यह कदम हमास के समर्थन में उठाया गया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लगभग रोजाना मिसाइल और ड्रोन हमले होने लगे। 2024 में यह संघर्ष और गहराया, जिससे हजारों लोगों की जान गई और लाखों लोग विस्थापित हुए।

2026 में हालात क्यों बिगड़े?

फरवरी 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव के बाद क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदले। इसके तुरंत बाद हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हमले तेज कर दिए। जवाब में इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक और जमीनी अभियान शुरू कर दिए, जिससे स्थिति और विस्फोटक हो गई।

जमीनी अभियान और रणनीति

मार्च 2026 के मध्य में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान, खासकर लितानी नदी के आसपास सीमित जमीनी अभियान शुरू किया। IDF का कहना है कि इसका उद्देश्य उत्तरी इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हिज्बुल्लाह के ठिकानों को खत्म करना है।

हिज्बुल्लाह की भूमिका और ताकत

हिज्बुल्लाह 1982 में इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद अस्तित्व में आया। यह एक ईरान समर्थित शिया संगठन है, जो समय के साथ लेबनान की राजनीति, समाज और सुरक्षा ढांचे में गहराई से शामिल हो गया है। 1992 से यह लेबनान की राजनीति में सक्रिय है और संसद व सरकार में इसकी भागीदारी रही है। साथ ही, यह स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवाओं के जरिए आम जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए है।

इजरायल के प्रति रुख और विवाद

हिज्बुल्लाह इजरायल को अपना मुख्य दुश्मन मानता है और उसके खिलाफ लगातार हमले करता रहा है। 2009 के अपने घोषणापत्र में भी उसने इजरायल के अस्तित्व को खत्म करने की बात कही थी। शेबा फार्म्स जैसे सीमा विवाद भी दोनों के बीच तनाव का बड़ा कारण हैं।
वर्तमान हालात ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

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