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भारत-पाकिस्तान व्यापार लगभग ठप, दवाओं के लिए अब भी भारत पर निर्भर पाकिस्तान

Published on: May 8, 2026
India-Pakistan trade approx
द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों का सीधा व्यापार लगभग पूरी तरह बंद हो गया है। अटारी-वाघा बॉर्डर बंद होने, पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और सिंधु जल संधि निलंबित किए जाने के बाद द्विपक्षीय व्यापार अब लगभग शून्य पर पहुंच गया है। हालांकि, इसके बावजूद पाकिस्तान अब भी दवाइयों और फार्मा कच्चे माल के लिए भारत पर निर्भर बना हुआ है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार 2018 में 2.41 अरब डॉलर था, जो 2024 तक घटकर करीब 1.2 अरब डॉलर रह गया। भारत को होने वाला पाकिस्तानी निर्यात 2019 के 547.5 मिलियन डॉलर से गिरकर 2024 में सिर्फ 4.8 लाख डॉलर तक पहुंच गया।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अटारी बॉर्डर को बंद कर दिया था, जो दोनों देशों के बीच व्यापार का एकमात्र जमीनी मार्ग था। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का औपचारिक आदेश जारी किया।
हालांकि औपचारिक व्यापार लगभग बंद हो चुका है, लेकिन पाकिस्तान अभी भी भारत से दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल खरीद रहा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2025 के बीच पाकिस्तान ने भारत से करीब 36.6 मिलियन डॉलर का आयात किया, जिसमें अधिकांश हिस्सा फार्मास्यूटिकल कच्चे माल का था। यह आयात विशेष मानवीय छूट के तहत किया गया।
इसके अलावा, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सिंगापुर जैसे तीसरे देशों के जरिए अनौपचारिक व्यापार भी जारी है। अनुमान है कि इस अप्रत्यक्ष व्यापार का आकार करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
भारत से व्यापार बंद होने का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान के फार्मा उद्योग पर पड़ा है। पाकिस्तान का दवा उद्योग एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और तैयार दवाओं के लिए लंबे समय से भारतीय आपूर्ति पर निर्भर रहा है। अब दूसरे देशों से आयात करना पाकिस्तान को महंगा पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।
इसके अलावा रसायन, खाद्य उत्पाद, कपास, स्टील, सीमेंट और औद्योगिक कच्चे माल जैसे क्षेत्रों पर भी असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार बंद होने से पाकिस्तान की पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।

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