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एक ही दिन क्रैश हुए अमेरिका और रूस के परमाणु बॉम्बर, शीतयुद्ध की यादें हुईं ताजा

Published on: June 17, 2026
America and Russia crashed on the same day.

द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन/मॉस्को। दुनिया की दो महाशक्तियों अमेरिका और रूस के रणनीतिक परमाणु बॉम्बर विमानों के एक ही दिन दुर्घटनाग्रस्त होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सोमवार को अमेरिका का B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस और रूस का Tu-22M3 रणनीतिक बॉम्बर अलग-अलग घटनाओं में क्रैश हो गया। दोनों विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं और शीतयुद्ध के दौर में एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे।

अमेरिकी वायु सेना के अनुसार, दक्षिणी कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद B-52 बॉम्बर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार सभी आठ क्रू सदस्यों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि विमान नियमित परीक्षण मिशन पर था और उड़ान भरने के तुरंत बाद रनवे के पास गिरकर आग की चपेट में आ गया।

दुर्घटना के बाद घटनास्थल से उठता काले धुएं का विशाल गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा गया। हवाई फुटेज में रेगिस्तानी इलाके का बड़ा हिस्सा जला हुआ दिखाई दिया। अमेरिकी वायु सेना ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।

उधर, उसी दिन रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान Tu-22M3 बॉम्बर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। मंत्रालय के मुताबिक विमान के सभी क्रू सदस्य समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। सोशल मीडिया पर सामने आए अपुष्ट वीडियो में विमान को तेजी से नीचे गिरते और दुर्घटनास्थल से धुआं उठते देखा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार B-52 और Tu-22M3 दोनों ही अपने-अपने देशों की रणनीतिक सैन्य क्षमता के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। शीतयुद्ध के दौरान इन्हें लंबी दूरी तक परमाणु और पारंपरिक हथियार पहुंचाने के लिए विकसित किया गया था। दोनों विमान दुश्मन के सैन्य अड्डों, भूमिगत ठिकानों और नौसैनिक परिसंपत्तियों पर हमला करने में सक्षम हैं।

B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस अमेरिकी वायु सेना का लंबी दूरी का सबसोनिक बॉम्बर है, जो लगभग 31,750 किलोग्राम तक हथियार और सैन्य सामग्री ले जा सकता है। यह कई प्रकार के परमाणु और पारंपरिक बमों के साथ-साथ क्रूज मिसाइलें भी दाग सकता है। दशकों पुराना होने के बावजूद यह आज भी अमेरिकी रणनीतिक बलों की रीढ़ माना जाता है।

वहीं, रूस का Tu-22M3, जिसे नाटो ने ‘बैकफायर’ नाम दिया है, एक सुपरसोनिक रणनीतिक बॉम्बर है। यह Kh-22 क्रूज मिसाइलों और किंजल जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। रूस ने हाल के वर्षों में इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में भी किया है।

एक ही दिन दोनों देशों के रणनीतिक बॉम्बरों का दुर्घटनाग्रस्त होना सैन्य विश्लेषकों के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है। हालांकि दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रकार का संबंध होने के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन इस संयोग ने शीतयुद्ध के दौर की प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक हथियारों की अहमियत को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


इसे भी पढ़ें : ओमान तट के पास भारतीय नाविकों वाले जहाज पर हमला, MT Jalveer में लगी आग; हालात पर नजर रखे हुए है भारत


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