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मोदी के जकार्ता दौरे का बड़ा असर, इंडोनेशिया खरीदेगा भारत की ‘अस्त्र’ मिसाइलें

Published on: July 8, 2026
Modi's visit to Jakarta

द  देवरिया न्यूज़,जकार्ता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारत को रक्षा क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। इंडोनेशिया ने भारत में विकसित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का ऐलान किया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद सामने आया। इस समझौते को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के सामरिक सहयोग के लिए अहम माना जा रहा है।

मोदी के विमान को सुखोई लड़ाकू विमानों ने किया एस्कॉर्ट

सोमवार को जब प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता पहुंचे तो इंडोनेशियाई वायुसेना के सुखोई लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया। अब इन्हीं सुखोई विमानों को भारत की ‘अस्त्र’ मिसाइलों से लैस करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे इंडोनेशिया की वायु शक्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

16 सुखोई विमानों पर लगेगी ‘अस्त्र’ मिसाइल

इंडोनेशिया के पास वर्तमान में 16 Su-30 लड़ाकू विमान हैं। भारत की तरह इंडोनेशिया भी इन विमानों में ‘अस्त्र’ मिसाइल को एकीकृत (इंटीग्रेट) करेगा। इससे उसके लड़ाकू विमानों की लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ जाएगी।

क्या है ‘अस्त्र’ मिसाइल?

‘अस्त्र’ भारत की स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं:

  • मारक क्षमता लगभग 100 किलोमीटर तक।
  • अधिकतम गति मैक 4.5
  • एक्टिव रडार होमिंग सीकर से लैस।
  • भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और तेजस लड़ाकू विमानों में पहले से तैनात।
  • अस्त्र के Mk-1, Mk-2 और Mk-3 संस्करण विकसित किए जा चुके हैं।

भारत के रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हथियारों की क्षमता चर्चा में आने के बाद ‘अस्त्र’ मिसाइल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। इंडोनेशिया को इसका निर्यात भारत के रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे भविष्य में अन्य देशों के साथ भी रक्षा सौदों की संभावनाएं मजबूत होंगी।

भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग हुआ और मजबूत

भारत और इंडोनेशिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है। वर्ष 2018 में दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग के साझा दृष्टिकोण को अपनाया था। इसके बाद रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सैन्य तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अस्त्र’ मिसाइल सौदा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा और भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह एक अहम कदम साबित हो सकता है।


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