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मुस्लिम आरक्षण विवाद: मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Published on: July 9, 2026
Muslim Reservation Dispute Madras

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा वर्ग (Backward Class) के तहत आरक्षण का लाभ देने से जुड़े विवाद में तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 2024 के सरकारी आदेश (Government Order) को असंवैधानिक करार दिया गया था।

क्या था हाई कोर्ट का फैसला?

मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस पी.बी. बालाजी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर किसी व्यक्ति को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) का दर्जा नहीं दिया जा सकता। अदालत ने माना कि तमिलनाडु सरकार का आदेश पूर्व में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए न्यायिक निर्णयों के अनुरूप नहीं है। अदालत के अनुसार, धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति मुस्लिम माना जाएगा, लेकिन उसे स्वतः पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) के आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

2024 में जारी हुआ था सरकारी आदेश

वर्ष 2024 में तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश जारी कर कहा था कि पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, अधिसूचित समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले वे लोग, जिन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया है, उन्हें पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में माना जाएगा। इसके आधार पर संबंधित समुदाय प्रमाणपत्र (Community Certificate) भी जारी किए जाने लगे थे। इस व्यवस्था के तहत जिन मुस्लिम समुदायों का उल्लेख किया गया था, उनमें अंसार, दक्कनी मुस्लिम, दुबेकुला, लब्बाई, रौथर, मराकयार, मपिल्ला, शेख और सैयद सहित अन्य समुदाय शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई विशेष अनुमति याचिका

मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के बाद तमिलनाडु सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल कर फैसले को चुनौती दी है। रिपोर्टों के अनुसार, यह याचिका 6 जुलाई 2026 को दायर की गई।

अब सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

मामले में अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि मद्रास हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा या तमिलनाडु सरकार के 2024 के आदेश को कानूनी वैधता मिलेगी। इस फैसले का प्रभाव राज्य में धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

नोट: इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। अदालत में मामला विचाराधीन है और सभी पक्षों के तर्कों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।


इसे भी पढ़ें : करूर भगदड़ मामले में सीएम थलपति विजय को सुप्रीम कोर्ट से राहत, डीएमके की याचिका वापस


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