द देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन : बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के बीच इमारतों को ठंडा रखना दुनिया भर में बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर (AC) का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इससे बिजली की खपत और कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है। ऐसे में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो बिना एसी के ही इमारतों को ठंडा रखने में मदद कर सकती है।
पर्ड्यू यूनिवर्सिटी (Purdue University) के इंजीनियरों ने दुनिया का सबसे सफेद पेंट तैयार किया है। यह विशेष पेंट सूर्य की अधिकांश किरणों को वापस अंतरिक्ष की ओर परावर्तित कर देता है, जिससे छत और दीवारें सामान्य पेंट की तुलना में काफी ठंडी रहती हैं।
98.1% सूरज की रोशनी करता है रिफ्लेक्ट
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नया पेंट सूर्य की 98.1 प्रतिशत रोशनी को वापस परावर्तित कर देता है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। सामान्य सफेद पेंट और बाजार में उपलब्ध “कूल रूफ” पेंट सूर्य की लगभग 80 से 90 प्रतिशत रोशनी ही वापस भेज पाते हैं, जबकि बाकी गर्मी सतह में समा जाती है। इस नई तकनीक के कारण इमारत की सतह कम गर्म होती है और अंदर का तापमान भी स्वाभाविक रूप से कम बना रहता है।
कैसे तैयार किया गया यह पेंट?
यह शोध ACS Applied Materials & Interfaces जर्नल में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने इस पेंट को तैयार करने के लिए कई सफेद पदार्थों का परीक्षण किया और अंततः बेरियम सल्फेट (Barium Sulfate) को मुख्य सामग्री के रूप में चुना। बेरियम सल्फेट का उपयोग पहले से ही कॉस्मेटिक्स, फोटोग्राफिक पेपर और अन्य उत्पादों में किया जाता है। इसकी उच्च परावर्तन क्षमता इसे इस पेंट के लिए उपयुक्त बनाती है।
शोधकर्ताओं ने पेंट में अलग-अलग आकार के सूक्ष्म कण (Particles) मिलाए। अलग-अलग आकार के ये कण सूर्य की विभिन्न तरंगदैर्घ्य (Wavelengths) की रोशनी को प्रभावी ढंग से परावर्तित करते हैं, जिससे लगभग पूरा सौर स्पेक्ट्रम वापस लौट जाता है।
कितना असरदार है यह पेंट?
परीक्षणों में पाया गया कि तेज धूप के दौरान इस पेंट से ढकी सतह का तापमान आसपास की हवा की तुलना में लगभग 4.5 डिग्री सेल्सियस कम रहा। वहीं, सूर्यास्त के बाद इसका प्रभाव और अधिक देखने को मिला। उस समय पेंट की गई सतह का तापमान आसपास के वातावरण से करीब 10.5 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि सर्दियों के दौरान भी इस पेंट ने बेहतर प्रदर्शन किया।
ऊर्जा बचाने में मिल सकती है बड़ी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पेंट का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाए, तो इमारतों में एयर कंडीशनर की जरूरत काफी कम हो सकती है। इससे बिजली की बचत होगी, ऊर्जा खर्च घटेगा और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह तकनीक ऊर्जा दक्ष (Energy Efficient) भवन निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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