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सिंगापुर के पूर्व राजनयिक का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, बोले- ‘देश की सबसे बड़ी समस्या उसकी सेना और नेता’

Published on: July 5, 2026
Former Singaporean diplomat

द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में अपनी भूमिका को पाकिस्तान भले ही बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा हो, लेकिन सिंगापुर के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज भी गंभीर आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है और उसकी सबसे बड़ी समस्या बाहरी नहीं, बल्कि उसके अपने राजनीतिक नेतृत्व और सेना से जुड़ी है।

‘पाकिस्तान विफलता की कगार पर खड़ा है’

एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के भविष्य पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए बिलहारी कौसिकन ने कहा कि पाकिस्तान इस समय विफलता की कगार पर खड़ा दिखाई देता है। उन्होंने माना कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित कराने में पाकिस्तान ने सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन इससे देश की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला। उनके अनुसार, कूटनीतिक सफलता तब तक सार्थक नहीं मानी जा सकती जब तक उसका लाभ आम नागरिकों के जीवन और देश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई न दे।

‘विदेश नीति से नहीं भरेगा जनता का पेट’

कौसिकन ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि में कुछ हद तक सुधार हो सकता है, लेकिन इससे देश के आर्थिक संकट या जनता की रोजमर्रा की परेशानियां समाप्त नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अभी भी बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और केवल विदेश नीति की उपलब्धियों के आधार पर इसे मजबूत नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, अमेरिका भी पाकिस्तान पर लगे सभी प्रतिबंधों या सीमाओं को पूरी तरह हटाने की दिशा में तत्काल कोई बड़ा कदम उठाएगा, इसकी संभावना कम है।

पाकिस्तानी पत्रकार को दिया सीधा जवाब

सम्मेलन के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि पाकिस्तान की अधिकांश समस्याओं के लिए भारत और अफगानिस्तान जिम्मेदार हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिलहारी कौसिकन ने कहा कि हर समस्या का दोष पड़ोसी देशों या भौगोलिक परिस्थितियों पर नहीं डाला जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा संकट उसके अपने राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य व्यवस्था की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने इसे बाहरी कारणों के बजाय आंतरिक प्रशासनिक और राजनीतिक विफलताओं से जुड़ी समस्या बताया।

भारत की भूमिका पर भी रखी राय

सम्मेलन में भारत की रणनीतिक भूमिका पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कौसिकन ने कहा कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभर रहा है और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत अमेरिका का विकल्प नहीं बन सकता। उनके अनुसार भारत की अपनी रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं और उसका मुख्य ध्यान हिंद महासागर क्षेत्र पर केंद्रित है।

‘भारत रक्षा क्षेत्र में बन रहा महत्वपूर्ण भागीदार’

बिलहारी कौसिकन ने कहा कि भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। उन्होंने फिलीपींस सहित कई देशों को भारत द्वारा रक्षा उपकरणों की आपूर्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक रक्षा बाजार में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की रणनीतिक और आर्थिक भूमिका और मजबूत हो सकती है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अमेरिका की जगह लेना फिलहाल उसके लिए संभव नहीं है।

पूर्व राजनयिक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान अपनी हालिया कूटनीतिक गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि उनके बयान ने पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियों, आर्थिक स्थिति और राजनीतिक व्यवस्था पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


इसे भी पढ़ें : सिंधु जल संधि पर भारत का रुख बरकरार, विदेश मंत्रालय बोला- आतंकवाद बंद होने तक निलंबन रहेगा जारी


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