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चाबहार पोर्ट पर भारत-ईरान की बातचीत तेज, अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच रणनीतिक हित सुरक्षित रखने पर जोर

Published on: August 4, 2026
India-Iran at Chabahar Port

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत और ईरान के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट के प्रबंधन को लेकर बातचीत जारी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत अमेरिकी प्रतिबंधों में संभावित राहत का इंतजार करते हुए भी इस परियोजना में अपने दीर्घकालिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है।

बताया जा रहा है कि भारत चाहता है कि यदि भविष्य में अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देता है, तो चाबहार पोर्ट के संचालन संबंधी अधिकार भारत को पूर्व सहमति के अनुसार वापस मिल सकें। इसके लिए भारत ईरान से कानूनी आश्वासन की मांग कर रहा है।

स्थानीय पोर्ट अथॉरिटी के साथ अंतरिम व्यवस्था पर चर्चा

रिपोर्टों के मुताबिक, भारत और ईरान के बीच ऐसी व्यवस्था पर बातचीत चल रही है, जिसके तहत फिलहाल स्थानीय पोर्ट अथॉरिटी पोर्ट का प्रबंधन संभालेगी। वहीं, प्रतिबंध हटने की स्थिति में प्रबंधन संबंधी अधिकार भारतीय पक्ष को सौंपने का प्रावधान सुनिश्चित किया जाएगा।

भारत को उम्मीद है कि इस तरह की कानूनी व्यवस्था भविष्य में परियोजना की निरंतरता बनाए रखने में मदद करेगी।

अमेरिकी प्रतिबंधों का असर

भारत ने अक्टूबर 2025 में अमेरिका से चाबहार पोर्ट परियोजना के लिए छह महीने की प्रतिबंध छूट प्राप्त की थी, जिसकी अवधि 25 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई। इसके बाद परियोजना के संचालन और भविष्य को लेकर नई रणनीति पर काम किया जा रहा है।

इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित नई वार्ता की खबरों ने भी इस परियोजना को लेकर उम्मीदें बढ़ाई हैं।

भारत के लिए चाबहार पोर्ट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

1. मध्य एशिया तक सीधी पहुंच

चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराता है।

2. चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी भागीदारी कम करता है, तो इस रणनीतिक परियोजना में चीन की भूमिका बढ़ सकती है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

3. अफगानिस्तान के लिए वैकल्पिक व्यापार मार्ग

यह बंदरगाह अफगानिस्तान के लिए समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है, जिससे पाकिस्तान पर उसकी निर्भरता कम होती है।

4. अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC)

चाबहार पोर्ट को International North-South Transport Corridor (INSTC) का अहम हिस्सा माना जाता है, जो भारत और यूरोप के बीच व्यापार को तेज और कम लागत वाला बना सकता है।

5. हिंद महासागर में रणनीतिक उपस्थिति

यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करती है और क्षेत्रीय समुद्री कनेक्टिविटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2016 में हुआ था त्रिपक्षीय समझौता

भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने वर्ष 2016 में चाबहार पोर्ट के विकास और उपयोग को लेकर त्रिपक्षीय समझौता किया था। इसके बाद भारत ने बंदरगाह के विकास और संचालन में निवेश बढ़ाया। हालांकि, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों और बदलते भू-राजनीतिक हालात के कारण परियोजना की गति समय-समय पर प्रभावित होती रही है।

फिलहाल भारत की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां चाहे जैसी भी रहें, चाबहार पोर्ट में उसकी रणनीतिक और आर्थिक भागीदारी सुरक्षित बनी रहे।


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