द देवरिया न्यूज़,काराकस : वेनेजुएला में बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक दुर्लभ भूकंपीय घटना थी, जिसे “अर्थक्वेक डबलेट” कहा जाता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस विनाशकारी भूकंप की वजह क्या रही।
1. दो टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर वाला संवेदनशील क्षेत्र
वेनेजुएला ऐसे भू-भाग में स्थित है जहां कैरिबियन (Caribbean Plate) और दक्षिण अमेरिकी (South American Plate) टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के संपर्क में हैं।
इन प्लेटों के लगातार दबाव और खिसकने की वजह से क्षेत्र में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बुधवार को भी प्लेटों के बीच हुई तीव्र भूगर्भीय हलचल ने शक्तिशाली भूकंप को जन्म दिया।
2. उथली स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग बनी मुख्य कारण
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का प्रमुख कारण उथली स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग (Shallow Strike-Slip Faulting) था।
इस प्रक्रिया में पृथ्वी की परतों के बीच मौजूद दरारों (फॉल्ट) के दोनों हिस्से क्षैतिज दिशा में तेजी से खिसकते हैं। जब यह खिसकाव अचानक होता है तो बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिससे तेज भूकंप आता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी वजह से पहले 7.1 तीव्रता और उसके तुरंत बाद 7.5 तीव्रता का और भी शक्तिशाली भूकंप आया।
3. ‘अर्थक्वेक डबलेट’ जैसी दुर्लभ घटना
वेनेजुएला में कुछ ही सेकंड के अंतराल पर लगभग समान तीव्रता के दो बड़े भूकंप आए। इस प्रकार की घटना को अर्थक्वेक डबलेट (Earthquake Doublet) कहा जाता है।
सामान्यतः किसी बड़े भूकंप के बाद छोटे-छोटे आफ्टरशॉक आते हैं, लेकिन डबलेट में दूसरा भूकंप पहले जितना या उससे भी अधिक शक्तिशाली हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति अधिक खतरनाक होती है क्योंकि पहला झटका इमारतों और ढांचों को कमजोर कर देता है, जबकि दूसरा झटका उन्हें पूरी तरह ढहा सकता है।
आफ्टरशॉक का खतरा बरकरार
USGS का कहना है कि दोनों भूकंपों के बाद आने वाले दिनों में आफ्टरशॉक (Aftershocks) जारी रह सकते हैं। इससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
भारी तबाही और बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा
भूकंप का सबसे ज्यादा असर राजधानी काराकस और आसपास के क्षेत्रों में देखा गया है। कई इमारतें ढह गई हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं और हवाई अड्डे के संचालन पर भी असर पड़ा है।
राहत एजेंसियों का मानना है कि मलबा हटने के बाद हताहतों की वास्तविक संख्या सामने आएगी और मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। फिलहाल बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य में जुटे हुए हैं।
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