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RSS प्रमुख मोहन भागवत के देशव्यापी दौरे में उठे जाति और मुस्लिम संबंधों के सवाल, दिए विस्तार से जवाब

Published on: February 27, 2026
RSS chief Mohan Bhagwat's nationwide

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत इन दिनों संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर के दौरे पर हैं। इस दौरान उनके भाषण और संवाद कार्यक्रम विशेष चर्चा में हैं। इन कार्यक्रमों में भागवत संघ से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुलकर जवाब दे रहे हैं, जो पहले कम ही देखने को मिला है।

इन चर्चाओं में विशेष रूप से दो मुद्दे प्रमुख रहे हैं—संघ नेतृत्व और जाति का संबंध तथा मुस्लिम समुदाय के साथ RSS के रिश्तों को लेकर संघ का दृष्टिकोण।

संघ में पद जाति से नहीं, कार्य और समर्पण से मिलता है

संघ प्रमुख के ब्राह्मण होने को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। इस पर मोहन भागवत ने कहा कि संघ की स्थापना ऐसे सामाजिक परिवेश में हुई थी, जहां प्रारंभिक कार्यकर्ताओं में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी। इसी कारण शुरुआती नेतृत्व में उनका प्रतिनिधित्व अधिक दिखाई दिया।

हालांकि, संघ का कहना है कि संगठन में किसी भी पद के लिए जाति नहीं, बल्कि व्यक्ति का समर्पण, कार्यक्षमता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण होती है। संघ से जुड़े लोगों के अनुसार, संगठन के विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग जातियों और सामाजिक वर्गों के लोग जिम्मेदार पदों पर कार्य कर रहे हैं। सरसंघचालक का चयन भी आपसी सहमति और विश्वास के आधार पर किया जाता है।

जातीय भेदभाव खत्म करने पर जोर

जातिगत भेदभाव और सामाजिक विषमता के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि समाज में तनाव तब पैदा होता है, जब लोग स्वयं को एक साझा राष्ट्र और मातृभूमि की संतान के रूप में नहीं देखते। उन्होंने कहा कि ऊंच-नीच की भावना से ऊपर उठकर समाज में सद्भाव और एकता को बढ़ावा देना आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग सामाजिक रूप से पीछे रह गए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। उनके अनुसार, जाति-विहीन समाज का निर्माण केवल सरकार या किसी एक संगठन से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक सामाजिक प्रयास जरूरी हैं।

मुस्लिम समुदाय और ‘घर वापसी’ पर भी रखा पक्ष

मुस्लिम समुदाय और ‘घर वापसी’ के मुद्दे पर पूछे गए सवालों के जवाब में भागवत ने कहा कि भारत के अधिकांश मुस्लिमों के पूर्वज यहीं के निवासी थे और उन्होंने इतिहास में किसी समय धर्म परिवर्तन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को लालच, दबाव या धोखे से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना गलत है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी धर्म को अपनाना चाहता है, तो उसे ऐसा करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इस विषय पर उनकी टिप्पणियों पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ मुस्लिम नेताओं, जिनमें अरशद मदनी भी शामिल हैं, ने इस मुद्दे पर असहमति व्यक्त की है।

शताब्दी वर्ष में संवाद पर विशेष जोर

संघ का शताब्दी वर्ष उसके इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस अवसर पर संघ नेतृत्व समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने और संगठन के विचारों को स्पष्ट करने पर जोर दे रहा है। भागवत के देशव्यापी दौरे को इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।


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