पिता की अपेक्षाएं और बेटे का दबा हुआ आक्रोश
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी युवक के पिता एक पैथोलॉजी लैब संचालक थे और वे चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने। इसके लिए वे उस पर NEET परीक्षा पास करने का लगातार दबाव बना रहे थे। घटना वाले दिन भी पिता-पुत्र के बीच इसी मुद्दे को लेकर विवाद हुआ।
आरोप है कि बहस के बाद 21 वर्षीय युवक ने अपने पिता को गोली मार दी। इसके बाद उसने अपराध छिपाने के लिए शव के कई टुकड़े किए। कुछ टुकड़ों को घर के बाहर फेंका गया, जबकि अन्य को घर में ड्रम में छिपा दिया गया। इतना ही नहीं, उसने अपनी छोटी बहन को धमकाकर चुप रहने के लिए मजबूर किया और पुलिस को गुमराह करने के लिए पहले पिता के लापता होने और बाद में आत्महत्या की झूठी कहानी सुनाई। पुलिस के अनुसार, यह घटना अचानक आवेश में नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई प्रतीत होती है।
करियर की दौड़ और बढ़ता मानसिक दबाव
यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है—क्या करियर बनाने का दबाव इतना बढ़ गया है कि वह रिश्तों को भी तोड़ दे? भारत में NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं।
इनमें से बहुत कम छात्रों को ही प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मिल पाता है। कोटा जैसे कोचिंग केंद्रों से हर साल छात्रों की आत्महत्या की खबरें सामने आती रहती हैं, जो इस दबाव की गंभीरता को दर्शाती हैं।
संवादहीनता और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू पारिवारिक संवाद की कमी भी है। आरोपी युवक की मां का पहले ही निधन हो चुका था। हालांकि परिवार में अन्य सदस्य मौजूद थे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर परिवार में खुलकर संवाद होता और युवक की मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश की जाती, तो संभव है कि स्थिति इतनी भयावह न बनती।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में बढ़ता तनाव, अकेलापन और असफलता का डर खतरनाक रूप ले सकता है। ऐसे में माता-पिता और परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। बच्चों की भावनाओं को समझना, उन पर अत्यधिक दबाव न डालना और समय-समय पर उनका भावनात्मक सहयोग करना जरूरी है।
समाज के लिए चेतावनी
लखनऊ की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह दर्शाती है कि करियर की दौड़, पारिवारिक अपेक्षाएं और संवाद की कमी मिलकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिशा में परिवार, समाज और शिक्षा प्रणाली को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि युवाओं को सुरक्षित और सहायक वातावरण मिल सके।