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बांग्लादेश में तारिक रहमान के फैसलों से बदले संकेत, भारत से रिश्ते सुधारने की कोशिश या रणनीतिक कदम?

Published on: February 22, 2026
Tariq Rahman in Bangladesh

द देवरिया न्यूज़,ढाका/नई दिल्ली : बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चुनावी जीत के बाद नए नेता तारिक रहमान के फैसलों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में अचानक सकारात्मक बदलाव के संकेत दिए हैं। वर्ष 2001 में BNP के शासनकाल के दौरान भारत के साथ रिश्ते तनावपूर्ण रहे थे, इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को लेकर नई दिल्ली में सतर्क आशावाद का माहौल है।

पिछले 18 महीनों में मोहम्मद यूनुस के शासनकाल के दौरान दोनों देशों के संबंध काफी खराब हो गए थे। हालात इतने बिगड़ गए थे कि बांग्लादेश की क्रिकेट टीम भारत में होने वाले विश्वकप में भी हिस्सा नहीं ले पाई थी। लेकिन अब सत्ता संभालने के बाद तारिक रहमान ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जो भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

वीजा सेवाएं बहाल, क्रिकेट संबंध सुधारने की पहल

बांग्लादेश ने भारत के लिए वीजा और कॉन्सुलर सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं। इसके साथ ही क्रिकेट संबंधों को बहाल करने के लिए भी बातचीत शुरू की गई है। भारत की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को चुनाव जीतने पर बधाई दी, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इसके अलावा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में ढाका पहुंचे।

यूनुस सरकार के कई फैसलों को पलटा

तारिक रहमान ने सत्ता संभालते ही पूर्व सरकार के कई अहम फैसलों को पलटना शुरू कर दिया है। BNP सांसदों ने यूनुस द्वारा गठित संवैधानिक सुधार परिषद में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके अलावा ‘जुलाई चार्टर’ के कई प्रावधानों, जैसे संसद में दो सदन बनाने और राष्ट्रपति को अतिरिक्त शक्तियां देने के प्रस्ताव पर भी रहमान ने आपत्ति जताई है।

प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव शुरू हो गए हैं। यूनुस सरकार के करीबी और भारत विरोधी माने जाने वाले कई अधिकारियों को हटाया गया है। नई दिल्ली में तैनात प्रेस मंत्री फैसल महमूद को समय से पहले ही पद से हटा दिया गया।

अल्पसंख्यकों और भारत को भरोसा देने की कोशिश

तारिक रहमान ने अपने मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक समुदाय के चार नेताओं को शामिल किया है, जिनमें एक हिंदू और एक बौद्ध मंत्री भी शामिल हैं। उन्होंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा किया है, जिसे भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

क्रिकेट और कूटनीति के जरिए संबंध सुधारने की पहल

बांग्लादेश के नए खेल मंत्री अमीनुल हक ने क्रिकेटरों के खिलाफ दर्ज मामलों को सुलझाने और भारत के साथ क्रिकेट संबंध फिर से शुरू करने की इच्छा जताई है। उन्होंने इस संबंध में भारतीय अधिकारियों से मुलाकात भी की है।

रणनीतिक मजबूरी या दीर्घकालिक नीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति और आर्थिक जरूरतें भारत के साथ सहयोग को अनिवार्य बनाती हैं। देश के कई सीमावर्ती जिलों के लोग इलाज, व्यापार और अन्य जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर हैं।

इसके अलावा, शेख हसीना की अवामी लीग अभी भी बांग्लादेश की एक मजबूत राजनीतिक ताकत बनी हुई है। ऐसे में तारिक रहमान संतुलित विदेश नीति अपनाकर अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर नरम रुख दिखाया है और चीन व पाकिस्तान के साथ भी संतुलित संबंध रखने की बात कही है।

क्या भारत को BNP पर भरोसा करना चाहिए?

तारिक रहमान के हालिया कदम भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत जरूर देते हैं। हालांकि, भारत के लिए यह एक संवेदनशील कूटनीतिक स्थिति है, जहां भरोसे के साथ-साथ सतर्कता भी जरूरी है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और नीतिगत फैसले ही तय करेंगे कि यह बदलाव स्थायी है या केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा।


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