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ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर पाकिस्तान का दावा, शहबाज-असीम मुनीर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग तेज

Published on: April 10, 2026
Pakistan on Iran-US ceasefire
द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान खुद को अहम मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी कूटनीतिक कोशिशों ने दोनों देशों को युद्ध से पीछे हटने और बातचीत की राह चुनने के लिए प्रेरित किया। इस दावे के बाद पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग तक उठने लगी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की भूमिका की सराहना किए जाने के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक और मीडिया हलकों में उत्साह देखा जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार यह तर्क दिया जा रहा है कि यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता ने एक बड़े युद्ध को टालने में मदद की है, तो उसके नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए।
पाकिस्तान समर्थक विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामाबाद ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी के जरिए तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका दावा है कि पाकिस्तान की सक्रिय भागीदारी के कारण ही दोनों पक्षों ने सैन्य संघर्ष के बजाय वार्ता को प्राथमिकता दी।
हालांकि, इस दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। स्कॉटलैंड के पूर्व मंत्री हमजा यूसुफ ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि उसने संभावित विनाशकारी युद्ध को टालने में योगदान दिया है और इसके लिए आभार का पात्र है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संकेत है कि वैश्विक कूटनीति का केंद्र अब यूरोप से हटकर एशिया की ओर बढ़ रहा है।
वहीं ब्रिटिश पत्रकार टोमी रॉबिनसन ने इस दावे का मजाक उड़ाते हुए पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान पर भरोसा करना मुश्किल है क्योंकि अतीत में उस पर आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “पाकिस्तान को फिर से भारत में मिला देना चाहिए।”
पाकिस्तान के भीतर भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर विभाजित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक ओर समर्थक इसे पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स इस दावे का मजाक भी उड़ा रहे हैं। कुछ लोगों ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि अगर भारत-पाक तनाव में मध्यस्थता के दावों के लिए डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल मिल सकता है, तो शहबाज शरीफ और असीम मुनीर को भी मिलना चाहिए।
इस बीच पाकिस्तान ने दावा किया है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच आगे की वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उन्होंने दोनों देशों के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया है और ईरान तथा अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है।
हालांकि, अब तक अमेरिका और ईरान की ओर से पाकिस्तान की भूमिका को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में पाकिस्तान के दावों की वास्तविक सीमा को लेकर सवाल बने हुए हैं।
फिलहाल, इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान को वैश्विक कूटनीतिक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है—चाहे सराहना के रूप में या फिर आलोचना और व्यंग्य के रूप में।

इसे भी पढ़ें : देवरिया के सौम्य वत्सल मिश्र ने ISRO के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार SMOPS-2026 में किया प्रतिनिधित्व

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