अब तक नेपाल में यह परंपरा रही थी कि प्रधानमंत्री अलग-अलग देशों के राजदूतों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करते थे। लेकिन बालेन शाह ने इस व्यवस्था को बदलते हुए सामूहिक कूटनीतिक संवाद की शुरुआत की है, जिसे विश्लेषक नेपाल की विदेश नीति में “स्ट्रैटेजिक रीसेट” के रूप में देख रहे हैं।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक के जरिए बालेन शाह ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनकी सरकार विदेश नीति को व्यक्ति आधारित नहीं, बल्कि संस्थागत और राज्य आधारित ढांचे में संचालित करना चाहती है। इसी दिन नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सभी कैबिनेट मंत्रियों को 2011 से लागू राजनयिक आचार संहिता (Diplomatic Code of Conduct) की जानकारी भी दी, जिससे यह संदेश और मजबूत हुआ कि नई सरकार कूटनीतिक प्रक्रियाओं को अधिक औपचारिक और व्यवस्थित बनाना चाहती है।
नेपाल सेना के पूर्व मेजर जनरल बिनोज बसनयत ने इस पहल को “रणनीतिक कूटनीतिक रीसेट ब्रीफिंग” बताया। उनके अनुसार, नेपाल अब प्रतिक्रिया-आधारित और पार्टी-प्रभावित विदेश नीति से आगे बढ़कर स्पष्ट, संतुलित और राज्य-केन्द्रित कूटनीति अपनाना चाहता है।
जिन देशों के राजदूतों को इस बैठक में बुलाया गया, उनमें भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, कतर, इजरायल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि शामिल थे। इसके बाद बालेन शाह ने 11 देशों के राजदूतों से अलग से द्विपक्षीय मुलाकात भी की।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सभी राजदूतों ने नेपाल की नई सरकार को समर्थन देने और सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से बालेन शाह ने यह संदेश दिया है कि उनकी सरकार किसी एक शक्ति केंद्र की ओर झुकाव नहीं रखेगी, बल्कि भारत, चीन और अमेरिका जैसे वैश्विक एवं क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संतुलित संबंध बनाए रखेगी।
नेपाल के राजनीतिक सलाहकार असीम शाह ने कहा कि पहले विदेशी राजदूतों का प्रधानमंत्री से अत्यधिक और अनौपचारिक संपर्क एक सामान्य बात बन गया था, जो राजनयिक मानकों के अनुरूप नहीं था। नई व्यवस्था इस संस्कृति को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर अक्सर चीन समर्थक रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। उनके कार्यकाल में भारत विरोधी नक्शा जारी करने जैसे कदमों ने नेपाल की विदेश नीति को विवादों में ला दिया था। ऐसे में बालेन शाह की यह नई पहल नेपाल की विदेश नीति को अधिक संतुलित और पेशेवर बनाने की कोशिश मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के दौर में बालेन शाह का यह कदम नेपाल की रणनीतिक स्वतंत्रता और संतुलित विदेश नीति का स्पष्ट संकेत है।