मेलानिया ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
व्हाइट हाउस में जारी एक लिखित बयान में मेलानिया ट्रंप ने कहा कि उनके और उनके वकीलों को लंबे समय से झूठी और निराधार अफवाहों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“मुझे बदनाम जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाली बातें पूरी तरह झूठी हैं और इन्हें तुरंत खत्म होना चाहिए।”
मेलानिया ने यह भी कहा कि इस तरह की अफवाहें फैलाने वाले लोगों में नैतिकता और जिम्मेदारी की कमी है। उन्होंने अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों को “घटिया” बताते हुए सिरे से खारिज किया।
2002 के ईमेल का किया जिक्र
अपने बयान में मेलानिया ने साल 2002 के एक पुराने ईमेल का भी जिक्र किया, जो “Dear G” से शुरू होता है और “Love, Melania” के साथ खत्म होता है। यह ईमेल एपस्टीन की करीबी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल से जुड़ा बताया जा रहा है।
मेलानिया ने कहा कि यह सिर्फ एक सामान्य और औपचारिक जवाब था, जिसका किसी गहरे संबंध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह न तो एपस्टीन की दोस्त थीं और न ही मैक्सवेल के साथ उनका कोई व्यक्तिगत रिश्ता था।
अचानक बयान पर उठे सवाल
मेलानिया का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब एपस्टीन मामला काफी हद तक सुर्खियों से बाहर हो चुका था और अमेरिकी राजनीति का फोकस मिडिल ईस्ट और चुनावी माहौल पर शिफ्ट हो गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर उन्होंने अब यह मुद्दा क्यों उठाया।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मेलानिया पिछले कई महीनों से इंटरनेट ब्लॉग्स और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को लेकर चिंतित थीं। इन प्लेटफॉर्म्स पर उनके कथित संबंधों को लेकर लगातार बातें की जा रही थीं, जिससे वह परेशान थीं।
व्हाइट हाउस भी रहा अनजान
रिपोर्ट के मुताबिक, मेलानिया का यह बयान पूरी तरह से व्यक्तिगत पहल पर आया। यहां तक कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस के कई अधिकारी भी इससे पहले इसकी जानकारी नहीं रखते थे।
बाद में एक फोन इंटरव्यू में खुद ट्रंप ने भी स्वीकार किया कि उन्हें इस बयान के बारे में पहले से कुछ पता नहीं था। उन्होंने कहा कि मेलानिया इस विषय पर बात करना चाहती थीं, लेकिन वह क्या कहेंगी, यह उन्हें भी मालूम नहीं था।
फिर चर्चा में आया पुराना मामला
मेलानिया ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर एपस्टीन मामला चर्चा में आ गया है। यह मामला पहले ही अमेरिकी राजनीति और समाज में बड़ा विवाद पैदा कर चुका है, और अब फर्स्ट लेडी के बयान ने इसे फिर से जीवित कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं, भले ही उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत छवि की सफाई देना ही क्यों न हो।