खुफिया इनपुट से बढ़ी चिंता
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बीजिंग ईरान को कंधे से दागी जाने वाली एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम (MANPADS) देने की तैयारी कर रहा है। ये सिस्टम खासतौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमानों के लिए खतरनाक माने जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, चीन इन हथियारों की आपूर्ति सीधे तौर पर न करके तीसरे देशों के जरिए करने की योजना बना रहा है, ताकि उसकी भूमिका छिपी रहे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही से बचा जा सके।
युद्धविराम पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बने संघर्ष विराम को कमजोर कर सकता है। गौरतलब है कि चीन ने ही इस संघर्ष को शांत कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, ऐसे में उसका यह कथित कदम विरोधाभासी माना जा रहा है।
चीन ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा,
“चीन ने इस संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष को कभी हथियार नहीं दिए हैं। यह जानकारी पूरी तरह गलत है।”
उन्होंने अमेरिका से बिना आधार के आरोप लगाने और तनाव बढ़ाने से बचने की अपील भी की। चीन का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
F-15 हमले के दावे से जुड़ा मामला
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान ने एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाया। हालांकि, ईरान ने इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसने एक “नए एयर डिफेंस सिस्टम” का इस्तेमाल किया, लेकिन उसकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
यह स्पष्ट नहीं है कि उस सिस्टम का चीन से कोई संबंध था या नहीं, लेकिन इस घटना के बाद से ही चीन-ईरान सैन्य सहयोग को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
पहले से जारी है तकनीकी सहयोग
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी कंपनियां पहले से ही ईरान को ‘डुअल-यूज टेक्नोलॉजी’ (दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक) उपलब्ध कराती रही हैं, जिससे ईरान अपने हथियार और नेविगेशन सिस्टम को मजबूत करता है।
हालांकि, अगर चीन सीधे तौर पर हथियारों की आपूर्ति करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
कूटनीतिक असर भी संभव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मई में चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। ऐसे में अगर यह मामला तूल पकड़ता है, तो दोनों देशों के बीच संबंधों और प्रस्तावित यात्रा पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर वैश्विक नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे न सिर्फ अमेरिका-चीन संबंध प्रभावित हो सकते हैं, बल्कि मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति भी बदल सकती है।