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8 साल बाद इजरायल दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, रक्षा सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पर रहेगा फोकस

Published on: February 23, 2026
Will visit Israel after 8 years

द देवरिया न्यूज़,तेल अवीव/नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह इजरायल के दौरे पर जाएंगे। करीब आठ वर्षों बाद उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत ने हालिया बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 93.5 अरब डॉलर का प्रावधान किया है। इस वजह से इस यात्रा को कूटनीतिक से अधिक रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि हाल के वर्षों में वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव हुए हैं और कई यूरोपीय देशों ने इजरायल से हथियार खरीद कम कर दी है या पुराने समझौते रद्द कर दिए हैं। ऐसे में इजरायल भारत जैसे बड़े और भरोसेमंद साझेदार के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।

रक्षा खरीद से आगे बढ़कर औद्योगिक साझेदारी पर जोर

इजरायली रक्षा विशेषज्ञ डॉ. लॉरेन डेगन एमॉस के अनुसार, भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि वह सुरक्षा प्रदाता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत का लक्ष्य आधुनिक तकनीक हासिल कर उसे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में विकसित करना है।

भारत अब केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन (UAV), इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) जैसी उन्नत तकनीकों में भी निवेश कर रहा है, ताकि सेना की ऑपरेशनल क्षमता और डिजिटल इंटीग्रेशन मजबूत हो सके।

भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और MRO हब बनने की संभावना

भारत सरकार की नीतियों के तहत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेक्टर में कस्टम ड्यूटी में छूट जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे इजरायली कंपनियों को भारत में सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने का अवसर मिल सकता है। इससे भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और इजरायल की तकनीकी मौजूदगी भी मजबूत होगी।

भारतीय निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर

इजरायली कंपनियों के लिए टाटा, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और भारत फोर्ज जैसी भारतीय निजी रक्षा कंपनियों के साथ साझेदारी के नए अवसर खुल रहे हैं। भारत में रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से इजरायल अपनी सेंसर, रडार और AI तकनीक को भारतीय प्लेटफॉर्म में शामिल कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम मोदी का यह दौरा भारत-इजरायल संबंधों को रक्षा खरीद से आगे बढ़ाकर तकनीकी सहयोग, संयुक्त उत्पादन और औद्योगिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाने में अहम भूमिका निभा सकता है।


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