डॉ. इलाही ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच कम से कम तीन बार सफल वार्ता हुई, जबकि भारत के विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच भी कई दौर की बातचीत हुई। उन्होंने इन संवादों को बेहद सकारात्मक और सहयोगपूर्ण बताया।
ईरानी प्रतिनिधि ने भारत के लोगों के प्रति भावुक शब्दों में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले लोगों के स्नेह और समर्थन को वह कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें भारतीयों की याद आती है, वे भावुक हो जाते हैं। उनके अनुसार, भारतीयों का व्यवहार और समर्थन असाधारण रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा ईरान की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। डॉ. इलाही ने बताया कि युद्ध शुरू होते ही उन्होंने तेहरान में अपने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि भारतीय नागरिकों और छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। उन्होंने तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग की भी सराहना की और कहा कि सभी भारतीय छात्र सुरक्षित हैं।
युद्धविराम के बावजूद ईरान में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इसी को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है। हालांकि, ईरान की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
जब डॉ. इलाही से अमेरिका-ईरान युद्धविराम में पाकिस्तान और चीन की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर किसी देश का नाम लेने से बचते हुए कहा कि कुछ देशों ने मिलकर संघर्ष विराम करवाने में सकारात्मक भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान और चीन ने अमेरिका तथा ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम के लिए मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, इस पर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ईरान के बीच इस संकट के दौरान बढ़ा कूटनीतिक संपर्क आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत कर सकता है।