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अमेरिका-ईरान युद्धविराम के पीछे मोजतबा खामेनेई की भूमिका? संघर्ष विराम से मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीद

Published on: April 9, 2026
Behind the US-Iran ceasefire
द  देवरिया न्यूज़,तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव के बाद संघर्ष विराम की घोषणा ने मध्य-पूर्व में शांति की नई उम्मीद जगा दी है। दोनों देशों के बीच पिछले एक महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष आखिरकार युद्धविराम समझौते पर पहुंच गया। खास बात यह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन समाप्त होने से महज 90 मिनट पहले दोनों पक्ष इस समझौते पर सहमत हुए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस युद्धविराम के पीछे ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि उन्हीं के निर्देश पर ईरान ने समझौते की दिशा में कदम बढ़ाया और वार्ताकारों को बातचीत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका था जब मोजतबा खामेनेई ने अपने वार्ताकारों को खुलकर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कहा। मोजतबा खामेनेई, पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अली खामेनेई की 28 फरवरी को युद्ध के शुरुआती चरण में एक हवाई हमले में मौत हो गई थी, जिसके बाद मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर चुना गया।
हालांकि, इस बीच कुछ इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि मोजतबा खामेनेई युद्ध के शुरुआती दिनों में हुए एक हमले में घायल होकर कोमा में हैं और उनका इलाज चल रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब तक मोजतबा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और केवल उनके बयान ही ईरानी सरकारी मीडिया के जरिए प्रसारित किए गए हैं।
युद्धविराम समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात की सुरक्षा की भी गारंटी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दो सप्ताह के युद्धविराम के दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही सुरक्षित रहेगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह व्यवस्था ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से और तकनीकी सीमाओं का ध्यान रखते हुए लागू की जाएगी।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इसकी सुरक्षा सुनिश्चित होना वैश्विक बाजारों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
वहीं, व्हाइट हाउस ने इस समझौते को अमेरिका की कूटनीतिक और सैन्य सफलता बताया है। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिकी सेना की कार्रवाई ने अमेरिका को वार्ता में मजबूत स्थिति दिलाई, जिसके चलते राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम बेहतर शर्तों पर समझौता कराने में सफल रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्धविराम टिकाऊ साबित होता है, तो इससे मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा।

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