द देवरिया न्यूज़,बांदा : बांदा के बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में अदालत द्वारा जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद इस जघन्य अपराध से जुड़े कई भयावह तथ्य सामने आए हैं। अदालती दस्तावेजों और गवाहों के अनुसार, यह मामला वर्षों तक मासूम बच्चों के साथ किए गए अमानवीय अत्याचार से जुड़ा है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।
रिश्तेदारों और मजदूरों के बच्चों को बनाया शिकार
जांच में सामने आया कि आरोपी रामभवन ने अपने सगे भांजे, मकान मालिक के बेटे सहित विभागीय साइटों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को भी शोषण का शिकार बनाया। आरोप है कि वह बच्चों को लालच देकर अपने सरकारी आवास और अन्य ठिकानों पर बुलाता था। चित्रकूट और बांदा के नरैनी स्थित उसके आवास को मासूमों के लिए ‘नर्क’ बताया गया।
पत्नी दुर्गावती भी रही बराबर की भागीदार
मामले में सामने आया कि आरोपी की पत्नी दुर्गावती इस अपराध में मूकदर्शक नहीं थी, बल्कि सक्रिय रूप से शामिल थी। आरोप है कि वह बच्चों का वीडियो बनाती थी और उन्हें डराकर चुप रहने के लिए मजबूर किया जाता था। बच्चों को धमकाने और लालच देने का सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा।
लालच देकर बुलाता था, चुप रहने के लिए देता था पैसे
जांच और गवाहों के अनुसार, आरोपी बच्चों को लैपटॉप सिखाने, गेम खिलाने और अच्छा खाना देने का लालच देकर बुलाता था। अत्याचार के बाद बच्चों को पैसे देकर चुप रहने का दबाव बनाया जाता था। एम्स, नई दिल्ली के डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट में भी बच्चों के साथ गंभीर अत्याचार की पुष्टि की गई।
अदालत में गवाही के दौरान सहम गए बच्चे
शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने बताया कि बच्चों के बयान दर्ज कराना बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। गवाही के दौरान बच्चे मानसिक रूप से बेहद सहमे हुए नजर आए। अदालत ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में मानते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
समाज को झकझोर देने वाला फैसला
अदालत के इस फैसले को न्याय व्यवस्था का सख्त संदेश माना जा रहा है, जिससे मासूमों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का संकेत मिला है। यह फैसला पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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