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विदाई भाषण में मोहम्मद यूनुस का बयान, ‘सेवन सिस्टर्स’ के जिक्र से बढ़ सकती है भारत-बांग्लादेश में तल्खी

Published on: February 18, 2026
Mohammad Yunus in farewell speech

द देवरिया न्यूज़,ढाका : बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने कार्यकाल के अंतिम संबोधन में ऐसा बयान दिया है, जिसे भारत के संदर्भ में संवेदनशील माना जा रहा है। यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश अपने खुले समुद्री मार्गों के जरिए भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (सेवन सिस्टर्स) और नेपाल-भूटान जैसे देशों के लिए आर्थिक अवसरों का द्वार बन सकता है।

हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन ‘सेवन सिस्टर्स’ का उल्लेख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ सकारात्मक और सहयोगपूर्ण संबंधों की बात कही है।

खुले समुद्र को बताया ‘ग्लोबल गेटवे’

अपने संबोधन में यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश का समुद्री तट केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का प्रवेश द्वार है। उन्होंने दावा किया कि देश अपने बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन कंपनियों के साथ समझौतों की दिशा में आगे बढ़ा है।

उनके मुताबिक, बंदरगाहों की दक्षता बढ़ाना क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए जरूरी है और बांग्लादेश इस क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत में पहले भी उठी आपत्ति

यह पहला मौका नहीं है जब यूनुस ने ‘सेवन सिस्टर्स’ का जिक्र किया हो। इससे पहले चीन दौरे के दौरान भी उन्होंने उत्तर-पूर्वी भारत का उल्लेख किया था, जिस पर भारत ने नाराजगी जताई थी। नई दिल्ली लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि उसके आंतरिक क्षेत्रों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की बाहरी टिप्पणी या दखल स्वीकार्य नहीं है।

विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस का ताजा बयान भी भारत में असहजता पैदा कर सकता है, खासकर तब जब ढाका में नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को सामान्य और मजबूत बनाने के संकेत दे रही है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों और हिंसा के बाद शेख हसीना सरकार का पतन हो गया था। इसके बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम शासन की कमान संभाली। अपने 18 महीने के कार्यकाल में उन्होंने कई बार भारत से अलग रुख अपनाया, जबकि चीन और पाकिस्तान के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाया।

अब देखना होगा कि नई सरकार के गठन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।


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