द देवरिया न्यूज़,रियाद : सऊदी अरब में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान में एक सप्ताह के भीतर 14,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई देश के निवास, श्रम और सीमा सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन को रोकने के लिए की गई है। इसके साथ ही सरकार ने ईरान युद्ध से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों पर भी कड़ी निगरानी शुरू कर दी है, जिससे यह अभियान और भी व्यापक हो गया है।
सऊदी गृह मंत्रालय के अनुसार, 26 मार्च से 1 अप्रैल के बीच विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त अभियान में कुल 14,242 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन गिरफ्तारियों में सबसे ज्यादा 7,884 मामले निवास कानून के उल्लंघन से जुड़े थे। इसके अलावा 3,948 लोगों को सीमा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर पकड़ा गया, जबकि 2,410 लोगों को श्रम कानून तोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया।
कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में लोगों को देश छोड़ने की प्रक्रिया में भी डाला गया है। मंत्रालय के मुताबिक, 23,815 लोगों को उनके दूतावासों के पास यात्रा दस्तावेज तैयार कराने के लिए भेजा गया है। वहीं 6,808 लोगों को अपनी वापसी यात्रा की बुकिंग पूरी करने का निर्देश दिया गया है। अब तक 6,285 लोगों को देश से निर्वासित भी किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि सऊदी प्रशासन अवैध निवासियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
इस अभियान के दौरान अवैध रूप से देश में प्रवेश करने की कोशिश करने वालों पर भी कार्रवाई की गई। कुल 1,449 लोगों को सीमा पार करते समय गिरफ्तार किया गया, जिनमें 27 प्रतिशत यमन और 71 प्रतिशत इथियोपिया के नागरिक बताए गए हैं। इसके अलावा 29 लोगों को अवैध रूप से देश छोड़ने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया।
सऊदी सुरक्षा एजेंसियों ने केवल अवैध रूप से रहने वालों पर ही नहीं, बल्कि उनकी मदद करने वालों पर भी सख्ती दिखाई है। इस दौरान 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अवैध प्रवासियों को ठहरने की जगह, रोजगार या परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई। ऐसे मामलों में भारी जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है।
इसी बीच, सऊदी अरब ने ईरान युद्ध से जुड़े मामलों में भी सख्ती बढ़ा दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युद्ध से संबंधित पोस्ट, टिप्पणियों और वीडियो शेयर करने वालों की निगरानी की जा रही है। एक मामले में कश्मीर के रहने वाले अमजद अली को दम्माम में हिरासत में लिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ा एक पोस्ट साझा किया था। उन्हें 25 मार्च को हिरासत में लिया गया था और उनके परिवार को अब तक उनकी स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब का यह कदम केवल अवैध प्रवास को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को बनाए रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। खासकर मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, जैसे ईरान से जुड़े तनाव, को देखते हुए सरकार किसी भी प्रकार की अस्थिरता या विवादास्पद गतिविधि को रोकने के लिए सतर्क नजर आ रही है।
कुल मिलाकर, सऊदी अरब का यह ‘मास क्रैकडाउन’ यह संकेत देता है कि देश कानून व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त नीति अपना रहा है। आने वाले समय में भी इस तरह के अभियान जारी रहने की संभावना है, जिससे विदेशी नागरिकों और प्रवासियों को स्थानीय नियमों का पालन करने के लिए और अधिक सतर्क रहना होगा।
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