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ईरान की मिसाइल ताकत से बढ़ी वैश्विक चिंता, आधुनिक युद्ध की रणनीति पर उठे नए सवाल

Published on: April 5, 2026
Iran's missile power
द  देवरिया न्यूज़,तेहरान : ईरान की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल क्षमताओं ने मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने जिस तरह अपनी मिसाइल और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया है, उसने आधुनिक युद्ध की रणनीतियों और पारंपरिक सैन्य ढांचे की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी से जारी संघर्ष में अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा बड़े पैमाने पर हमले किए जाने के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अब भी सुरक्षित बताया जा रहा है। आकलनों के मुताबिक, ईरान की 50 प्रतिशत से अधिक मिसाइल क्षमता अभी भी बरकरार है, जिससे वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने में सक्षम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने वर्षों से अपनी वायुसेना की सीमाओं को देखते हुए मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। इसका परिणाम यह हुआ कि उसने बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया, जो अब उसकी प्रमुख सैन्य ताकत बन गया है।

ईरान के पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा और विविध मिसाइल भंडार माना जाता है। इसमें मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (MRBM) शामिल हैं, जिनकी रेंज करीब 1500 से 2000 किलोमीटर तक है। खुर्रमशहर, इमाद और सज्जील जैसी मिसाइलें इसी श्रेणी में आती हैं। इसके अलावा, फतह नामक हाइपरसोनिक मिसाइलों की भी चर्चा है, जिनकी गति ध्वनि की गति से कई गुना अधिक बताई जाती है।

कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में ज़ुल्फ़िकार, देजफुल, हाजी कासिम और खैबर शिकन जैसे सिस्टम शामिल हैं, जो अलग-अलग दूरी तक मार करने में सक्षम हैं। इन मिसाइलों की खासियत यह है कि इनके लॉन्चर मोबाइल होते हैं, जिससे इन्हें तेजी से तैनात और स्थानांतरित किया जा सकता है, और इन्हें निशाना बनाना मुश्किल हो जाता है।

हालांकि, इजरायल और अमेरिका के पास थाड, पैट्रियट, आयरन डोम और डेविड्स स्लिंग जैसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर मिसाइल हमलों के सामने इन प्रणालियों पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे सिस्टम को संचालित करना महंगा और जटिल होता है, जिससे लंबे समय तक संघर्ष की स्थिति में चुनौती और बढ़ जाती है।

रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति दिखाती है कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार, मिसाइल क्षमता और ड्रोन युद्ध के संयोजन से तय होंगे। ईरान का मॉडल यह संकेत देता है कि सीमित संसाधनों वाला देश भी असममित युद्ध रणनीति के जरिए बड़ी शक्तियों को चुनौती दे सकता है।

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जहां मिसाइल और ड्रोन तकनीक निर्णायक भूमिका निभा सकती है।


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