विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस सहयोग के लिए आर्मेनिया के विदेश मंत्री अरारत मिर्जोयान और उनकी सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में आर्मेनिया का सहयोग सराहनीय है।
जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के 600 से अधिक मछुआरे इस समय ईरान में फंसे हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या कन्याकुमारी जिले के मछुआरों की है, जबकि कुछ लोग थूथुकडी, तिरुनेलवेली और रामनाथपुरम जिलों से भी हैं। भारत सरकार इन सभी नागरिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने के प्रयासों में जुटी हुई है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 717 छात्रों समेत कुल 1,043 भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित भारत लाया जा चुका है। वहीं, बाकी फंसे लोगों को निकालने की प्रक्रिया लगातार जारी है। सरकार ने मछुआरों के परिवारों को आश्वस्त किया है कि सभी को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
इस बीच, दक्षिण एशियाई मछुआरा संगठन के महासचिव जॉन चर्चिल ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि कन्याकुमारी के करीब 450 मछुआरे अभी भी ईरान में फंसे हुए हैं, जिनमें से कई समुद्र में नावों पर ही हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आर्मेनिया जैसे देशों का सहयोग इस मिशन को आसान बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।