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ईरान तनाव के बीच अमेरिका का बड़ा कदम: दुनिया का सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट रवाना

Published on: February 18, 2026
America's big deal amid Iran tension

द देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन किया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) को मिडिल ईस्ट भेजने का फैसला किया है। यह कदम ईरान के साथ बढ़ते तनाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड केवल एक जंगी जहाज नहीं, बल्कि समुद्र में तैरता हुआ परमाणु एयरबेस माना जाता है। इसका फुल-लोड डिस्प्लेसमेंट 1,00,000 टन है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक वॉरशिप बनाता है।

क्या होता है डिस्प्लेसमेंट और क्यों है अहम?

डिस्प्लेसमेंट का अर्थ है जहाज द्वारा पानी में हटाए गए पानी का कुल वजन। जब कोई जहाज पूरी तरह लोडेड होता है, तो उसका डिस्प्लेसमेंट उसकी वास्तविक ऑपरेशनल क्षमता को दर्शाता है। यूएसएस फोर्ड का 1,00,000 टन डिस्प्लेसमेंट यह दिखाता है कि इसमें ईंधन, हथियार, विमान, रसद सामग्री और हजारों कर्मियों के साथ भी संचालन की जबरदस्त क्षमता है। यह वजन लगभग 10 से 15 हजार वयस्क अफ्रीकी हाथियों के बराबर माना जाता है।

समुद्र में तैरता ‘न्यूक्लियर एयरबेस’

334 मीटर (1,106 फीट) लंबा यह जहाज 13 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है। इसके विशाल फ्लाइट डेक और अंदरूनी हैंगर में 75 तक एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं। साथ ही इसमें करीब 4,500 सैनिकों और स्टाफ के रहने और काम करने की व्यवस्था है।

यह कैरियर दो A1B न्यूक्लियर रिएक्टर से संचालित होता है, जिससे इसकी रेंज लगभग असीमित हो जाती है। पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता न होने के कारण यह दशकों तक बिना रीफ्यूलिंग के समुद्र में तैनात रह सकता है।

एयर विंग और रणनीतिक भूमिका

यूएसएस फोर्ड पर F/A-18 सुपर हॉर्नेट, E/A-18G ग्रोलर इलेक्ट्रॉनिक अटैक जेट, E-2D एडवांस्ड हॉकआई जैसे आधुनिक विमान तैनात रहते हैं। इसके अलावा हेलीकॉप्टर यूनिट भी शामिल होती है। इतनी बड़ी एयर पावर इसे अमेरिकी नौसेना की पावर प्रोजेक्शन रणनीति का केंद्र बनाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और दबाव दोनों बढ़ेंगे। पश्चिम एशिया में इसकी एंट्री आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकती है।


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