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ईरान में गिराए गए अमेरिकी F-15 के दूसरे क्रू का रेस्क्यू, दो दिन बाद सुरक्षित निकाला गया

Published on: April 6, 2026
Americans downed in Iran
द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन/तेहरान : ईरान के ऊपर मार गिराए गए अमेरिकी F-15 फाइटर जेट के दूसरे क्रू मेंबर को अमेरिकी सेना ने दो दिन तक चले हाई-रिस्क सर्च ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है, वहीं अमेरिकी सैन्य क्षमता और रेस्क्यू ऑपरेशन की रणनीति की भी चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को ईरानी बलों ने F-15 फाइटर जेट को निशाना बनाकर गिरा दिया था। उस समय विमान में सवार दोनों क्रू मेंबर ने इजेक्ट कर अपनी जान बचाई, लेकिन वे ईरानी जमीन पर गिर गए। इसके बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने उन्हें पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया।
हालांकि, अमेरिकी सेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले क्रू मेंबर को उसी दिन सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन दूसरा क्रू मेंबर लापता हो गया था। वह खुद को बचाने के लिए ईरान के पहाड़ी इलाकों में छिपा रहा और करीब दो दिनों तक दुश्मन की नजरों से बचता रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसिक अभियानों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन बेहद कठिन परिस्थितियों में अंजाम दिया गया और अब संबंधित अधिकारी पूरी तरह सुरक्षित हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की अहम भूमिका रही। सबसे पहले CIA ने एक भ्रामक अभियान चलाया, जिसमें यह अफवाह फैलाई गई कि पायलट को पहले ही खोज लिया गया है और उसे जमीन के रास्ते बाहर निकाला जा रहा है। इस रणनीति से ईरानी बलों का ध्यान भटकाया गया।
इसके बाद CIA ने अपनी उन्नत तकनीकी क्षमताओं का उपयोग कर लापता क्रू मेंबर की सटीक लोकेशन का पता लगाया। बताया जा रहा है कि वह पहाड़ की एक दरार में छिपा हुआ था और खुद को पकड़ से बचाने के लिए लगातार स्थान बदल रहा था। CIA ने यह जानकारी तुरंत पेंटागन और व्हाइट हाउस के साथ साझा की।
राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश के बाद 5 अप्रैल को बड़े स्तर पर रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया। इस दौरान दर्जनों लड़ाकू विमानों ने ऑपरेशन को कवर दिया, जबकि स्पेशल फोर्स के जवानों ने जमीन पर उतरकर भारी गोलीबारी के बीच उस क्रू मेंबर को सुरक्षित बाहर निकाला।
इस पूरे अभियान को अत्यंत जोखिम भरा और रणनीतिक रूप से जटिल बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे सटीक और साहसी रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक मान रहे हैं। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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